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The Royal College of Psychiatrists Improving the lives of people with mental illness

नींद

Sleep

 

 

Sleeping well finalयदि आपको या आपके किसी परिचित को नींद में परेशानी है - तो यह लेख आपके लिये है| इसमे नींद से जुड़ी कुछ समस्याओं के बारे में बताया गया है| इसमें कुछ आसान तरीके बताये गये हैं जो आपकी नींद को बेहतर बनाएँगे एवं ये बताएँगे कि क्या आपको विशेषज्ञ की मदद की जरूरत है|

सामान्यतः आपको नींद के बारे में सोचने की आवश्यकता नहीं होती| ये आपकी दिनचर्या का एक हिस्सा है| लेकिन ज्यादातर लोग कभी न कभी नींद आने मे परेशानी का सामना करते है| आप लोगो ने एक शब्द सुना होगा - अनिद्रा (Insomnia), अगर आप बहुत चिन्तित हों या बहुत उत्तेजित हों तो थोड़े समय के लिए आप इसके शिकार हो सकते हो और जब आपकी उत्तेजना या चिन्ता खत्म हो जाती है तो सब सामान्य हो जाता है| अगर आपको अच्छी नींद  नही आती है तो ये एक समस्या है क्योंकि नींद आपके शरीर और दिमाग को स्वस्थ एवं चुस्त रखती है|

 

नींद क्या है?

नींद हर 24 घंटे में नियमित रुप से आने वाला वो समय है जब हम अचेतन अवस्था मे होते है, और आस पास की चीजों से अनजान रहते है| नीद के दो प्रमुख हिस्से होते है-

 

1) तीव्र चक्षुगति निद्रा (Rapid Eye Movement Sleep - REM) 

ये अवस्था नींद का लगभग पांचवा हिस्सा बनाती है| इस दौरान दिमाग बहुत सक्रिय होता है आँखें तेजी से हरकत करती है | हम सपने देखते है | लेकिन हमारी मांसपेंशियाँ बहुत ढीली रहती है|

 

2) मन्द चक्षुगति निद्रा (Non Rapid Eye Movement Sleep -non REM)

इसमे मस्तिष्क शान्त रहता  है लेकिन हमारा शरीर चल फ़िर सकता है| रक्त में कुछ हार्मोन्स (Hormones) बनते है जिससे हमारा शरीर दिन भर की टूट फूट की मरम्मत करता है| इस अवस्था के चार भाग होते है।

       

  1. पूर्व निद्रा  - मांसपेंशियाँ ढीली हो जाती है, ह्र्दय गति धीमी हो जाती है और शरीर का तापमान कम हो जाता है|
  2. हल्की निद्रा - इस समय तक आपको बिना किसी परेशानी के आसानी से जगाया जा सकता है|
  3. मन्द तरंग निद्रा - हमारे खून का दौरा कम हो जाता है|हम इस अवस्था मे निद्रा में बोलने या चलने की क्रियायें हो सकती है|
  4. अति मन्द तरंग निद्रा - इस समय आपको जगाना बहुत कठिन होता है और यदि कोई आपको जगा दे तो आप बहुत अजीब सा महसूस करते है|

 

पूरी रात मे आप लगभग 5 बार  REM एवं non REM निद्रा के बीच आते जाते है और सुबह के समय ज्यादा सपने देखते है| एक सामान्य रात में आप लगभग हर दो घंटे पर 1-2 मिनट के लिये जगते हैं| आप सामान्यतः इस जगने के बारे में नहीं जान पाते| लेकिन आप इतना याद रख सकते हैं कि आपको घबराहट हो रही थी या बाहर कुछ हो रहा था जैसे शोर या आपका साथी खर्राटे ले रहा था।

 

हमें कितनी नींद की आवश्यकता होती है ?

यह उम्र पर निर्भर है|

1- बच्चे -17 घन्टे

2- किशोर - 9 से 10 घन्टे 

3- व्यस्क - 8 घन्टे

4- वृद्ध - व्यस्क के समान, लेकिन गहरी नींद केवल एक बार ही आती है, सामान्यतः शुरुआती 3-4 घन्टे- उसके बाद वे आसानी से जाग जाते हैं तथा वे स्वप्न भी कम देखते हैं| रात में जागने का थोड़ा समय भी उनको वास्तविकता से ज्यादा लम्बा लगता है। उनको लगता है कि वे उतना नहीं सोये हैं जितना कि वे वास्तव में सोये थे|

समान उम्र के लोगों के बीच मे भी अन्तर पाया जाता है| अधिकांश लोग 8 घन्टे सोते हैं जबकि कुछ लोगों के लिये 3 घन्टे की नींद ही पर्याप्त होती है|

 

क्या होगा अगर मै न सोऊँ ?

जब आपको नींद नहीं आती है तो आपको चिन्ता होती है। अगर आप एकाध रात न सोएं तो अगले दिन आप थका हुआ मह्सूस करते हैं लेकिन इससे आपके मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुँचता| लेकिन, अगर आप कई रातों तक ना सो पाये तो

  • आप हर समय थकान मह्सूस करेंगें
  • दिन भर झपकी लेंते रहेंगें
  • ध्यान नही लगा पायेंगे
  • निर्णय लेने में दिक्कत होगी
  • उदासी मह्सूस होगी

आप अगर वाहन चलाते हैं या मशीनों पर काम करते हैं तो यह खतरनाक हो सकता है| हर साल कई लोगों की म्रृत्यु इसलिये हो जाती है क्योंकि वे वाहन चलाते समय सो जाते हैं|

अनिद्रा से उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापा जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं|

 

व्यस्कों में निद्रा सम्बन्धी समस्याएँ :

कभी कभी आप महसूस करते हैं कि आपने पूरी नींद नहीं ली है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी आपको ताजगी महसूस नहीं होती| 

ठीक तरह से न सो पाने के कई कारण रोजमर्रा की जिंदगी से ज़ुडे होते हैं -

  • शयनकक्ष मै बहुत शोर हो या बहुत ठंडा या बहुत गर्म हो |
  • बिस्तर  छोटा  हो या आरामदायक ना हो |
  • आपकी सोने की कोई नियमित दिनचर्या न हो | 
  • आपके साथी का सोने का समय या तरीका आपसे अलग हो |
  • आपको पर्याप्त थकान न होती हो या आप पर्याप्त परिश्रम न करते हो |
  • आप बहुत देर में खाना खाते हो |  
  • आप भूखे पेट ही सोने के लिए चले जाते हों |
  • सोने से पूर्व चाय, काफी (जिनमे कैफीन नामक रसायन होता है), सिगरेट या शराब का सेवन करते हों।
  • आपको कोई रोग, दर्द या बुखार हो |

 

अनिद्रा के कुछ और गम्भीर कारण भी सकते है| जैसे  

  • भावनात्मक समस्यायें  
  • रोजगार सम्बन्धित परेशानियां 
  • उलझन और चिन्ता
  • उदासी की बीमारी - आप सुबह बहुत जल्दी उठ जाते है और फिर से सोने मे दिक्कत होती है 
  • बार -बार समस्याओं के बारे मे सोचना 

 

अपनी मदद स्वंय करना

यहाँ कुछ आसान तरीके दिये गये है जो आपके लिए उपयुक्त हो सकते है

 

क्या करना चाहिए ?

  • बिस्तर एवं शयन कक्ष आरामदायक हो, बहुत ठंडा या गरम न हो |
  • इस बात का ध्यान रखे कि आपका गद्दा आपके लिए उपयुक्त हो | अगर वो बहुत सख्त होगा तो आप के कन्धो व कमर पर ज्यादा दबाव पडेगा| अगर बहुत ज्यादा मुलायम हो तो आपका शरीर नीचे चला जाता है जो कि आपकी पीठ के लिये नुक़सानदायक है| इस स्थिति में आपको अपना गद्दा बदल देना चाहिये ताकि आप को आराम मिले|
  • थोड़ा बहुत व्यायाम करें, लेकिन आवश्यकता से अधिक न करें। बस नियमित रूप से थोड़ी तैराकी या टहलना ठीक रहता है| दिन के समय व्यायाम करना ज्यादा अच्छा रहता है विशेषकर दोपहर के बाद या पूर्व सन्ध्या के समय| इसके बाद व्यायाम करने से आपकी नींद में दिक्कत हो सकती है|
  • सोने जाने से पूर्व थोड़ा रिलैक्स करें|
  • यदि कोई चीज़ आपको परेशान कर रही है और आप उसके बारे में सही तरीके से नहीं सोच पा रहे हों तो अपनी समस्या को सोने से पहले कागज़ पर लिख लें और स्वंय से कहें कि कल आप इस समस्या से निपटेगे|
  • अगर आप सो नहीं पाते हैं तो उठ जाएं और कुछ ऐसा करें जिससे आपको हल्का महसूस हो| जैसे – पढ़ना, टीवी देखना या हल्का संगीत सुनना और जब आप थकान महसूस करें तो फ़िर से सोने जायें|

 

क्या ना करें?

  • बहुत लम्बे समय तक न जागें| तभी सोने जायें जब आप थके हों| हर दिन का एक नियमित दिनचर्या बना लें| निश्चित समय पर उठें चाहे आप थका हुआ महसूस कर रहे हो या नहीं|
  • चाय या काफ़ी पीने के बाद कैफ़ीन काफ़ी देर तक शरीर में अपना प्रभाव बनाये रखती है, इसलिये दोपहर के बाद से इसका सेवन ना करें| यदि आप किसी गर्म पेय का सेवन करना चाह्ते हैं तो दूध या हर्बल पेय जिसमें कैफ़ीन न हो, का सेवन कर सकते हैं|
  • बहुत ज्यादा शराब का सेवन न करें| ये आपको जल्दी सोने में मदद तो कर सकती है लेकिन आप रात में अवश्य जागेंगे।
  • रात को बहुत लेट ज्यादा खानपान न करें| शाम को अपना भोजन लेने की कोशिश करें|
  • अगर आप एक रात नहीं सोये हों तो अगले दिन में न सोये अन्यथा अगली रात भी आप नहीं सो पायेंगे|
  • मोटापा घटाने वाली दवाओ का प्रयोग ना करे क्योंकि ये आपकी नींद में बाधा पहुँचाती हैं |
  • नशे की गोलियां जैसे - हेरोइन, कोकेन, एम्फ़िटामीन का प्रयोग न करें क्योंकि ये कैफ़ीन की तरह ही आपकी नीद में बाधा पहुँचाती हैं|

 

अगर उपरोक्त उपाय करने के बाद भी आप नहीं सो पा रहे हैं तो चिकित्सक से परामर्श लें| आप अपने डाक्टर से अपनी हर समस्या के बारे में परामर्श ले सकते हैं| आपके डाक्टर आपको बता सकते हैं कि आपकी अनिद्रा का कारण कोई शारीरिक बीमारी है, कोई दवा है जो आप खा रहे हैं, या कोई भावात्मक समस्या है| इस बात के प्रमाण है कि "काग्नीटिव बिहैवियर थिरैपी" (CBT) आपकी अनिद्रा की समस्या का समाधान कर सकती है|

 

मनोचिकित्सा:

काग्नीटिव थिरैपी आपकी उस गलत सोच को बदलती हो जिसके कारण आप चिन्तित होते हों और आपको सोने में दिक्कत हो रही है।

 

स्टिम्यूलस कन्ट्रोल (Stimulus Control) आपकी मदद करता है-

  • इस बात का ध्यान रखें कि जब आप बिस्तर पर हों - आप तभी सोने जाएँ जब आप थका मह्सूस करें और अपने बिस्तर का उपयोग केवल सोने और सेक्स के लिये ही करें।
  • बिस्तर पर ऐसे कार्य न करें जो आपको सोने न दें जैसे टीवी पर उत्तेजक कार्यकम देखना, कार्य करना या चीजें ठीक करना।
  • बिस्तर पर लेटे हुए चिन्ता न करें बल्कि बिस्तर से उठ जायें और कुछ हल्का फ़ुल्का कार्य करें।

प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सिशन (Progressive Muscle Relaxation): आपकी मांसपेशियां को आराम देने में सहायक होता है। एक एक करके आप अपनी मांसपेशियों में तनाव लाते हैं, फ़िर ढीला करते हैं- ऐसा आप नीचे से ऊपर की ओर करते हैं अर्थात सर्वप्रथम पैर फ़िर हाथ फ़िर कन्धे, फ़िर चेहरा व गर्दन्।

 

क्या दवाईयाँ मदद कर सकती हैं ?

लोग सालों से नींद की गोलियां का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन अब हम जानते हैं कि वे

  • बहुत लम्बे समय तक काम नहीं करती हैं।  
  • आपको अगले दिन थका हुआ और चिड़चिड़ा बनाती है।
  • बहुत जल्दी अपना असर खो देती हैं जिससे आपको बाद में समान असर के लिये ज्यादा दवा लेनी पड़ती है।
  • आपको नशे की आदत लगा देती है। जितने ज्यादा समय तक आप ये गोलियां लेते हैं आप उन पर उतने ज्यादा निर्भर हो जाते हैं।

 

कुछ नई दवाइयाँ आई हैं लेकिन इनमें भी पुरानी दवाइयों के नुकसान हैं।

 

नींद की गोलियां केवल बहुत थोड़े समय के लिये लेनी चाहिये (2 हफ़्ते से कम समय के लिये) जब आप इतने परेशान हों कि सो ही न पाये।

अगर आपको लम्बे समय तक नींद की दवाइयाँ लेनी हो तो अपने डाक्टर से सलाह लेने के बाद उनकी मात्रा धीरे धीरे कम कीजिये।

कभी कभी उदासी खत्म करने की दवाओं का प्रयोग बेहतर रहता है |

 

ओवर द काउन्टर मेडिकेशन (Over the Counter Medication) :

आप अपने दवा विक्रेता से कुछ नींद की गोलियां बिना किसी डाक्टर के पर्चे के ले सकती हैं। ऐसी दवाइयों में ज्यादातर एन्टी हिस्टामीनिक होते हैं जो कि फ़ीवर, सर्दी जुकाम में दिये जाते हैं। ये कार्य करती हैं लेकिन आपको अगली सुबह भी हल्की नींद में रखती हैं। अगर आप इन दवाइयों को लेते हैं तो अगली सुबह गाडी न चलाये और मशीनो के साथ काम न करें । इन दवाइओ को लगातार इस्तेमाल करने से आपके शरीर को इनकी आदत पड़ सकती है। इसलिये बेहतर है कि आप ऐसी दवाइयों को लम्बे समय तक न लें।

हर्बल दवाइयाँ ज्यादातर वैलेरिन नामक हर्ब पर आधारित होती है| ये तब ज्यादा असर करती है कि जब आप 2-3 सप्ताह या ज्यादा समय तक हर रात इन्हें ले| अगर आप इन्हें कभी कभी लेते है तो ये कार्य नही करती| जैसा कि एन्टी हिस्टामीनिक के साथ होता है वैसे ही इन दवाइयों को लेने पर आपको अगली सुबह सावधान रहना चाहिये | अगर आप अपने रक्तचाप के लिए कोई दवा लेते है(या कोई और नींद की गोली ) तो आपको डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए |

आपको कभी कभी रात में काम करना पड़ सकता है जब सामान्यतः आप सोते है |अगर ऐसा कभी कभी होता है तो आप आसानी से समायोजन कर लेते है। लेकिन अगर आपके साथ लगातार ऐसा होता रहे तो आपको परेशानी होती है। शिफ़्ट में कार्य करने वाले कर्मचारी (shift workers),चिकित्सक एव नर्स जिन्हे सारी रात काम करना पड़ता है या स्तन पान कराने वाली माँ ,इन सबको ये दिक्कत होती है कि इनको तब सोना पड़ता है जब सामान्यतः ये जगते है|ये "जेट लैग" की तरह होता है जिसमें अलग अलग समय मे तीव्र गति से यात्रा करने के कारण आप उस समय जागते हैं जब बाकी सब सोते हैं |

सामान्य होने का अच्छा तरीका यह है कि आप रात मे चाहे जब सोये हो सुबह निशिचत समय पर उठे| इसके लिए आप अलार्म घड़ी का उपयोग कर सकते है |इस बात का ध्यान रखे कि अगली रात आप 10 बजे से पहले न सोये |अगर आप ऐसा कुछ रातो तक करेगे तो जल्द ही आप रात मे सही समय पर सोने लगेगे|

 

बहुत ज्यादा सोना (अतिनिन्द्रा)- Hypersomnia

कभी कभी आपको लगता है कि आपको दिन के समय भी नीद आ रही जब आपको जगना होता है सामान्यत ऐसा रात मे न सोने के कारण होता है|

अगर आपको लगता है कि रात मे पूरी नींद लेने के बाद भी लगातार 1 या 2 हफ्तो तक आपको ज्यादा नीद आ रही हो तो आपको डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए| कुछ शारीरिक रोग जैसे मधुमेह ,वायरल फीवर या थायराइड सम्बंधी समस्या इसका कारण हो सकते है|कुछ अन्य कारण भी हो सकते है|

 

1: नार्कोलेप्सी (दिन में ज्यादा सोना)

 यह कम पाया जाने वाला रोग है जिससे चिकित्सक इसे पहचानने मे अकसर गलती कर देते है

   इसके दो मुख्य लक्षण होते है - 

क) आपको दिन भर बहुत नीद महसूस होती है तथा आपको अचानक नीद के गहरे झटके आते है जिसे आप रोक नही पाते है चाहे आप और लोगों के साथ ही क्यों न बैठे हों |

ख) जब आप बहुत गुस्से में या उत्तेजित होते है या हँस रहे होते हैं तो आप अपनी मासपेशियो नियंत्रण खो देते है और गिर जाते है इसको कैटालेप्सी कहते हैं| कभी कभी ये उम्र के साथ ठीक हो जाता है |

 

 ऐसा भी हो सकता है कि आप: 

  • जब सोने जाने वाले हो या उठने वाले हो तो कुछ बोल न पाये या चल न पाये (Sleep Paralysis)।
  • अजीब सी आवाजें सुने या स्वप्न जैसी तस्वीरें देखें (Hallucinations)।
  • आप एक स्वचालित यन्त्र की तरह कार्य करते हैं, आप कुछ कार्य कर देते हैं लेकिन आप को पता नहीं चलता। आप को लगता है कि आप सो रहे थे।
  • घबराहट में अचानक उठ जाएँ।

 

नार्कोलेप्सी का कारण हाइपोक्रिटिन नामक तत्व की कमी का होना है।

      इसके उपचार के लिये सर्वप्रथम आप नियमित व्यायाम करिये एवं सोने की नियमित दिनचर्या बनाइये। अगर इससे मदद नहीं मिलती है तो कुछ दवाइयाँ आपकी मदद कर सकती हैं। जैसे एन्टीडिप्रेसेन्ट एवं मोडफ़ेनिल।

एन्टीडिप्रेसेन्ट जैसे क्लोमिप्रामीन एवं फ़्लूआक्सिटीन कैटालेप्सी में सहायक होती है। इसके अलावा सोडियम आक्सीबेट नाम की नई दवा भी उपलब्ध है।

 

स्लीप एप्नीया (Interupted Sleep)

  • आप रात मे तेजी से खर्राटे लेते है और रात मे अचानक से थोडे समय के लिए आपकी साँस रुक जाती है। ऐसा श्वास नली के ऊपरी हिस्से के बन्द हो जाने से होता है।
  • हर बार जब आपकी साँस रुक जाती है, आप अचानक से जाग जात्ते हैं और आपके शरीर, हाथ व पैर में कुछ झटके महसूस होते हैं ।
  • आप थोड़ी देर के लिये जगते हैं और फ़िर से सो जाते हैं।

 

      ऐसा रात में कई बार होता है। आप अगले दिन थका हुआ महसूस करते हैं और आपको इतनी तेज नींद आती है कि आप खुद को रोक नहीं पाते हैं। अतः सुबह जागने पर आपका मुँह सूखा लगता है और सिर दर्द होता है।

 

अगर आप -

  • उम्रदराज हैं
  • मोटे हैं (वजन ज्यादा है)
  • धूम्रपान करते हैं
  • मदिरा सेवन करते हैं

तो आपको स्लीप एप्नीया होने की ज्यादा सम्भावना रहती है।

ये समस्या रोगी के बजाय ज्यादातर उसका साथी बताता है।

चिकित्सा:

  • धूम्रपान एवं मदिरा सेवन बन्द करें।
  • दूसरी स्थिति में सोने का प्रयास करें।
  • आपको सी पी ए पी मास्क(CPAP Mask) पहनने की आवश्यकता पड़ सकती हैं ये आपकी नाक के अन्दर लगता है व तेज दबाव में हवा अन्दर भेजता है व श्वास नली को खुला रखता है।

 

कुछ अन्यसम स्याएँ:

हर 20 में से व्यक्ति को नाइट टेरर होते हैं । हर 100 में से 1 व्यक्ति सोते हुए चलता है, ये दोनों समस्याएँ बच्चों में ज्यादा होती हैं ।

 

स्लीप वाकिंग: अगर आपको ये बीमारी है तो अन्य लोगों को ऐसा लगता है कि आप बहुत गहरी नींद से जगे हैं। आप उठते हैं व कुछ कार्य करते हैं। ये कार्य कठिन भी हो सकते हैं जैसे आस पास घूमना, सीढ़ियों से ऊपर नीचे आना। इसमें कई बार आप खुद को परेशानी में भी डाल सकते हैं । अगर आपको कोई जगाए न तो आपको अगले दिन कुछ याद नहीं रहता।   स्लीप वाकिंग कभी कभी नाइट टेरर के बाद हो सकती है। अगर आप को ठीक से नींद नहीं आती है या बहुत कम समय के लिये सोते हैं तो इस बात की सम्भावना ज्यादा है कि आप सोते हुए चलें । इसलिये एक पर्याप्त नींद लेना जरूरी हो जाता है।

      ऐसे रोगी को धीरे से उसके बिस्तर पर पुन: लिटा देना चाहिये और उसे जगाना नहीं चाहिये। दरवाजे व खिड़कियॉ बन्द रखनी चाहिये, धारदार वस्तुओं जैसे चाकू आदि को दूर रखना चाहिये।

नाइट टेरर : ये बिना स्लीप वाकिंग के भी हो सकता है। रोगी गहरी नींद से अचानक जगा हुआ प्रतीत होता है। रोगी अर्धनिद्रा में व बहुत डरा हुआ सा लगता है लेकिन बिना पूरी तरह जगे हुए ही वो पुन: सो जाता है। आप इस दौरान उनके साथ रह सकते हैं जब तक वो फ़िर से न सो जाएँ।

रोगी को अगले दिन इस बारे में कुछ भी याद नहीं रहता।

 

नाइट मेयर: हममे से अधिकांश को डरावने सपने या नाइट मेयर आते हैं। ये ज्यादातर देर रात में होते हैं जब हम सबसे सजीव एवं याद रहने वाले स्वप्न देखते हैं। इनमे कोई दिक्कत नहीं होती जब तक ये भावात्मक समस्याओं के कारण रोज नहीं होते। ये सामान्यतः किसी बहुत परेशान करने वाले या जीवन को संकट मे डालने वाली घटना जैसे तूफ़ान, महामारी, किसी की मौत, दुर्घटना या जानलेवा हमला के बाद होते हैं। इसके उपचार के लिये परामर्श एवं सलाह उपयुक्त रहती है।

 

रेस्टलेस लेग सिन्ड्रोम (Restless Leg Syndrome):

  •  आपको लगता है कि आपको पैर हिलाना जरूरी हो गया है और आप इसे रोक नहीं सकते (कभी - कभी शरीर के अन्य अंग भी)
  •  आपको अपने पैरों मे तकलीफ़, दर्द या जलन का अनुभव होता हो।
  •  ये आपको तब ज्यादा महसूस होता है जब आप खाली बैठे हों या आराम कर रहे हों।
  •  रात में ये दिक्कतें बढ़ जाती हों।
  •  जब तक आप टहले या अपने पैरों को खींचें  केवल तब तक आराम मिलता हो।
  •  आप दिन में एक जगह स्थिर बैठने और ठीक से सोने में परेशानी होती है।

 

हालाँकि कई लोग बचपन से ही इस बीमारी से ग्रसित होते हैं लेकिन ज्यादातर लोग मध्यावस्था में डाक्टर के पास जाते हैं। ये बीमारी आनुवंशिक होती है।

      अधिकांश मामलों में इस बीमारी का कोई कारण नहीं होता, लेकिन कभी कभी ये शारीरिक बीमारियों जैसे लौह तत्व व विटामिन की कमी, मधुमेह तथा गुर्दे की बीमारियों से हो सकती है। ये गर्भावस्था के दौरान भी कभी कभी हो सकता है।

      अगर इस बीमारी का कोई कारण नहीं हो जैसा कि अधिकांश मामलों में होता है तो उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को कितनी परेशानी है। अगर ज्यादा परेशानी है तो नींद बेह्तर करने के आसान उपायों से आराम मिल सकता है। ज्यादा गम्भीर मरीज़ो मे दवाइयों की आवश्यकता होती है। जैसे कि पार्किंसन्स रोग में प्रयोग होने वाली दवाएं, मिर्गी के दौरे मे प्रयोग होने वाली दवाएं, बेन्ज़ोडायाजिपीन, दर्द निरोधी दवाइयाँ।

अगर मरीज को आराम न मिले तो विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिये।

आटिस्म : इस रोग से ग्रसित रोगियो को कभी इस बात का अह्सास नहीं होता कि रात का समय सोने के लिये होता हो और वे रात भर इधर उधर चलते रहते हैं। इस बीमारी के लिये विशेषज्ञ डाक्टर की सलाह लेनी चाहिये।

 

For a list of references and further reading visit the English version of this leaflet.

 


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The original leaflet was produced by the RCPsych Public Education Editorial Board. Series Editor: Dr Philip Timms. Translated by Dr Anil Nischal & Dr Adarsh Tripathi. Reviewed by Dr Ashok Kr. Jainer & Dr J K Trivedi. Our thanks to Abhishek Srivastava for typing the leaflet in Hindi

Dates Original leaflet: April 2009  Translation: June 2009 Review due April 2011

© 2009 Royal College of Psychiatrists. This leaflet may be downloaded, printed out, photocopied and distributed free of charge as long as the Royal College of Psychiatrists is properly credited and no profit is gained from its use. Permission to reproduce it in any other way must be obtained from the Head of Publications. The College does not allow reposting of its leaflets on other sites, but allows them to be linked to directly.

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