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The Royal College of Psychiatrists Improving the lives of people with mental illness

 

थकावट

Tiredness

 

 

थकावट

हम सब कभी ना कभी थकान महसूस करते हैं। अक्सर हम उस थकान का कारण भी पहचान पाते हैं।हम आराम करते हैं और थकान दूर हो जाती हैं । मगर कुछ लोगो के लिये थकान गम्भीर परेशानी बन जाती है। थकान बहुत समय तक रहने से या बहुत ज्यादा थकान होने से हम कुछ और कर ही नहीं पाते। थकान हमें जीवन का आनन्द उठाने नहीं देती।

 

इस प्रकार की थकान सामान्य समस्या है हर 5 व्यक्तियों मे से एक व्यक्ति बहुत ज्यादा थकान महसूस करता है, और 10 मे से 1 व्यक्ति की थकान लम्बे समय तक चलती है। पुरुषो से ज्यादा यह शिकायत महिलाओं में पायी जाती है। थकावट किसी भी उम्र में हो सकती है, मगर बचपन और बुढापे में ज्यादा दिखाई देती है।

 

थकावट के कारण जानने के लिये इन बातों पर गौर करें :

 

  1.  आपके जीवन को थकावट की ओर झुकाने वाली बातें
  2.  थकान की शुरुआत कैसे हुई
  3.  कौन सी बातें थकान को बनाए रख रही हैं

 

थकान के कारण शारीरिक या मानसिक हो सकते हैं ।

 

शारीरिक

कारण :

 

  • मोटापा: यदि आपका वजन बहुत ज्यादा है, तो दैनिक काम करने के लिये भी शरीर को अधिक श्रम करना पड़ता हैं।
  • वजन बहुत कम होना:  आपका वजन यदि बहुत कम हो तो, हो सकता है कि आपके स्नायुओं की प्रबलता कम हो और आप, बिना थके, रोज के काम ना कर पाए।
  • गम्भीर बीमारियाँ, जैसे ग्लादयुलर फ़ीवर या कोई भी दर्दनाक बीमारी, थकावट का कारण बन सकती हैं।
  • उपचार: कई उपचार भी थकावट पैदा करते हैं :-
    ·    पेट या छाती पर शल्यक्रिया
    ·    कुछ दवाईयां जैसे ब्लोकर्स, कुछ दर्दनाशक दवाईयां,
    ·    कैन्सर के उपचार जैसे रेडियोथैरेपी और कीमोथेरेपी
  • यदि आप थके हों, तो आप हमेशा से कम काम करेंगें। काम कम करने से आपका शरीर अस्वस्थ बनता है। केवल एक सप्ताह बिस्तर में आराम करने से आपके स्नायुओं की कार्यक्षमता 10% कम होती है।
  • गर्भावस्था और स्तनपान, दोनों ही थकान का कारण बन सकते हैं।
  • नींद पूरी होने से आपको थकान हो सकती है और आपकी एकाग्रता पर भी असर पड़ सकता है।

 

मानसिक कारण

  • चिन्ता और तनाव थकान का कारण बन सकते हैं, खासकर अगर आपको समस्याओं का कोई हल नज़र नहीं आ रहा हो।
  • डिप्रेशन (उदासीनता) थकान का कारण बन सकती हैं। डिप्रेशन से नींद सुबह जल्दी खुले तो और भी थकान महसूस होगी।
  • रोजमर्रा की समस्याएँ: कठिनाई के समय तनाव और थकान हो सकती है यह हम सब जानते है, मगर सुखद घटनाएँ जैसे शादी करना, घर बदलना, भी थकावट का कारण बन सकते हैं। कठिन निर्णय खासकर वह जिनका कोई जवाब न हो, थकान पैदा कर सकते हैं।
  • मानसिक सदमा जैसे किसी की मौत, सम्बन्धों में तनाव आदि थकान का कारण बनते हैं।
  • खुद से बहुत अधिक अपेक्षा रखना: हम सब खुद के लिये कुछ प्रमाण स्थापित करते हैं और उन्हें पाने का ध्येय रखते हैं। इससे हमारे जीवन को दिशा मिलती है। यदि हम खुद से बहुत अधिक अपेक्षा करते हैं तो हम खुद अपनी असफ़लता के कारण बनते हैं।

दैनिक आदतें:

 

  • नींद : थकान होने पर यदि आप दिन में सोएं तो आपको रात को नींद लगने में तकलीफ़ हो सकती है।
  • ज्यादा सोना अगर आदत बन जाये तो उससे भी थकान होती है।
  • अगर आप किसी दिन बहुत अधिक काम करते हैं तो अगले दिन आपको और भी थकान होगी।

 

कामकाज और पारिवारिक जीवन:

  • निरन्तर समस्याएँ : जीवन में कुछ बातें ऐसी होती है, जिन्हे चाह कर भी हम नहीं बदल सकते। जब अपने जीवन पर नियन्त्रण ना पाने का एहसास होता है, तो हमें निराशा और थकावट होती है।
  • छोटे बच्चों की देखभाल: यदि आपका बच्चा रातभर नहीं सोता तो आप भी नहीं सो पाते। ऐसे में दैनिक काम करना भी बहुत कठिन हो जाता है।
  • रात को काम: रात्रि पारी में काम करने वाला व्यक्ति अधिक आसानी से थकता है। जिस व्यक्ति का काम का समय अक्सर बदलता है, उसे यह तकलीफ ज्यादा होती है।
  • काम में तनाव।

 

दैनिक पेय :

  • हम अगर दिन में छह कप काफी या दस कप चाय पीते हैं तो उससे हमारी नींद पर बुरा असर हो सकता है। नींद पूरी ना होने से चिढचिढापन और थकान हो सकती है।
  • शाम को शराब पीने से आप आधी रात को जाग सकते हैं। यदि आप नियमित शराब पीते हैं, तो उससे आपको उदासीनता हो सकती है और आपकी नींद पर भी असर पढ़ सकता है।

 

अनेक परेशानियां एक साथ आए तो उससे थकान हो सकती है। उदाहरण दे तो, मानो आपको किसी कारण तनाव हो, आप ठीक से सो नहीं पा रहे हो, और ऐसे में आपको फ़्लू हो जाए। आपको ऐसा लगेगा कि आराम किए बिना आप ठीक नहीं हो सकते। आराम करने से आप जल्द ही स्वस्थ हो जाते हैं। रोज के काम भी आप मुश्किल से कर पाते हैं। आप और चिन्तित और हताश हो जाते हैं, आपकी नींद पर और भी असर होता है। थकान और चिन्ता के इस चक्रव्यूह में आप फ़सते जाते हैं।

 

यदि थकावट हो तो क्या करें?

 अच्छी नींद के लिये:

  • रोज नियमित समय पर सोये और उठे, चाहे आपको जैसा भी लग रहा हो।
  • सोने के कमरे का तापमान आरामदायक हो - ना ज्यादा गरम, ना ज्यादा ठंडा।
  • देर रात को ज्यादा खाना ना खाए। शाम का खाना हो सके तो जल्दी खाइये।
  • दिन में सोना धीरे धीरे कम करें।
  • अगर नींद ना आये, तो बिस्तर पर पडे - पडे उसकी चिन्ता ना करे। उठकर कुछ शान्ति प्रदान करने वाले काम करें। जब नींद आए, तब जाकर सोएं।
  • शिथिलन (रिलैक्सेशन) के लिये हल्का संगीत, किताबें पढ़ना, गरम पानी से नहाना मदद करता है।
  • आपको यदि किसी बात की चिंता हो, तो उसे कागज पर लिखिए और अगले दिन उससे निपटने का निर्णय लीजिए।

 

यदि कुछ भी काम न आये तो अपने डाक्टर से सम्पर्क कीजिये।

 

 व्यायाम कीजिए:

कई बार थकान की वजह से लोग व्यायाम नहीं शुरु करते, मगर नियमित व्यायाम थकान कम करता है और कार्यशक्ति बढाता है।

 

थोड़े समय के लिए व्यायाम करने से शुरुआत करें। धीरे धीरे आप व्यायाम का समय बढा सकते हैं। रोज आधा घंटा व्यायाम का लक्ष्य रखें (चाहे छोटी किश्तों मे ही सही)

 

चलना सबसे आसान व्यायाम है, मगर आपको जो आनन्द दे, वह व्यायाम करें जैसे तैरना, साइकिल चलाना।

 

जब आप आधा घंटा कर सकें तो व्यायाम की तीव्रता बढाएं, जिससे आपकी साँस थोडी फूलने लगे।

 

यदि आपको और भी थकान लगे तो व्यायाम बन्द ना करें, कम करें।

 

कैफीन का सेवन कम करें:

चाय, काफी मे कैफीन होता है यह सब जानते हैं। अन्य चीजें जैसे कोला, कुछ दर्दनाशक दवाइयों, शक्तिबर्धक औषधियों में भी कैफीन होता है। धीरे धीरे कैफीन का सेवन कम करें और तीन हफ़्तों में बन्द करें।

 

एक महीना कैफीन से दूर रहकर देखें कि क्या आपको कुछ फ़ायदा हो रहा है। कैफीन बन्द करने से सिरदर्द हो सकता है। यदि ऐसा हो, तो कैफीन की मात्रा धीरे धीरे कम करें।

 

आप अगर रोज चाकलेट खाते हैं, तो वह भी बन्द करें। चाकलेट में उत्तेजक पदार्थ होते हैं।

 

आपकी वजन की समस्या सुलझाएं:

आपका वजन ज्यादा है तो धीरे धीरे वजन कम करने से आपको अच्छा लगेगा। एकदम वजन घटाने वाले (क्रश) डायट ना करें। इससे थकान बढ़ सकती है। डायट के अलावा, वजन घटाने का सबसे अच्छा मार्ग है व्यायाम।

 

यदि आप बहुत दुबले हैं तो जब तक आपका वजन सामान्य नहीं होता आप सशक्त नहीं होंगे। वजन ठीक होने पर आपके स्नायुओं का बल बढेगा।

 

आपके दिन/हफ़्ते का आयोजन इस तरह करें कि आप रोज थोड़ा थोड़ा काम कर सके।

 

वास्तविकता मे पूरे होने जैसे लक्ष्य रखें। यदि आप बहुत समय से थकावट महसूस कर रहें हैं, तो एक दिन मे पूरी तरह ठीक होने की अपेक्षा ना रखें। याद रखें - प्रगति चाहे कितनी ही छोटी क्यों ना हो, अच्छी बात है।

 

 

आपकी थकान से सीखिये - क्या आप खुद से कुछ ज्यादा ही अपेक्षा तो नहीं रख रहे? क्या आपके जीवन मे काम और आराम का सही मेल है? क्या आपको अपने जीवन लक्ष्य के बारे में पुनर्विचार करना चाहिये?

 

क्या

काम नहीं करता?

 

हम सब चाहते हैं कि कोई चमत्कार हो और हमारी थकान दूर हो जाए। मगर ऐसा कोई चमत्कार नहीं है। बाजार में ऐसे कई नुस्खे हैं जो थकान मिटाने का दावा करते है। इनमे से किसी के काम करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नही है , चाहे वह विटामिन, मिनरल की गोलियां हो, उत्तेजक हो या खास डायट हो।

 

अगर फ़िर भी ठीक ना लगे तो…

कोई कारण जरुर होगा। हो सकता है आपको कोई बीमारी हो जिसका निदान नहीं हुआ है, जैसे एनीमिया, थायरौड की समस्यायें, स्लीप आप्निया (नीद में कुछ समय के लिये साँस बन्द होना), रेस्टलेस लेग्स (पैरो में बेचैनी की बीमारी), एन्साइटी (दुश्चिन्ता) या उदासीनता। आपको अपने डाक्टर दे सलाह लेनी चाहिए।

 

एम ई और क्रानिक फ़टीग सि न्ड्रोम

कुछ लोगों को दीर्घकाल के लिये बहुत ज्यादा थकान होती है। इसे एम ई या क्रानिक सिन्द्रोम कहते हैं। डाकटर अब यह तो मानते हैं कि यह एक बीमारी है मगर इसके कारणों के बारे में अधिक जानकारी नही है।

 

हम यह जानते है कि कुछ जीवाणु (वायरस) की बीमारियों से एम ई या क्रानिक फ़टिक सिन्ड्रोम की शुरुआत हो सकती है। हम यह भी जानते हैं कि कुछ एम ई या क्रानिक फ़टिक सिन्ड्रोम के मरीजों के शरीर मे यह वायरस नहीं पाया जाता। हो सकता है कि वायरस के अलावा कुछ और हो जो क्रानिक फ़टिक सिन्ड्रोम को बनाए रखता है। हम इन्हें मेन्टेनिग फ़ैक्टर कहते हैं। यह आपको जल्दी ठीक होने से रोकते हैं।

 

मेन्टेनिग फ़ैक्टर कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे नींद की समस्या, एन्जाइटी(दुश्चिन्ता) या उदासीनता। ठीक होने की कोशिश भी कभी कभी समस्या बढाती है। उदाहरण दे तो, अगर आप ज्यादा आराम करते हैं तो आप कमजोर हो जाते हैं। फ़िर आप कुछ करने की कोशिश करें तो और भी थकान होती है।

 

एम ई या क्रानिक फ़टिक सिन्ड्रोम का ईलाज करने के लिये यह पहचान जरूरी है कि कौन से कारक उसे बनाए रख रहे हैं। इन कारकों का इलाज करने से कई मरीजों को आराम मिलता है। अक्सर यह वही कारक होते हैं जिनका जिक्र हमने ऊपर थकावट के कारकों में किया है।

 

एम ई या क्रानिक फ़टिक सिन्ड्रोम के लिए अब उपचार है। यह जरूरी है कि यह उस व्यक्ति की जरूरत के अनुकूल हो।

 

  • किसी व्यवसायिक की देखरेख में धीरे धीरे बढने वाले व्यायाम।
  • काग्नीटिव बिहैवियर थेरैपी (सी बी टी) इसमे आप अपने मदद ना करने वाले विचार पहचानकर और उन्हें बदलकर रोग का सामना करने का सामर्थ्य बढाते हैं।

 

अगर आप यह उपचार चाहते हैं तो आप को विशेषज्ञ या पुनर्वास थेरेपिस्ट की सलाह लेनी होगी। मगर ज्यादातर मरीजों को इस पुस्तिका में बताए गए उपायों से बहुत आराम मिलेगा।

 

 

For a list of references and further reading visit the English version of this leaflet.

 


RCPsych logo

Original leaflet produced by the RCPsych Public Education Editorial Board. Series Editor: Dr Philip Timms.
Translated by Dr Snehita Joshi  Reviewed by Drs Anil Nischal, Adarsh Tripathi & Bharat Saluja. Our thanks to Abhishek Srivastava for typing the leaflet into Hindi

Date of original leaflet: March 2008

Date of translation: July 2008

 

© 2008 Royal College of Psychiatrists. This leaflet may be downloaded, printed out, photocopied and distributed free of charge as long as the Royal College of Psychiatrists is properly credited and no profit is gained from its use. Permission to reproduce it in any other way must be obtained from the Head of Publications. The College does not allow reposting of its leaflets on other sites, but allows them to be linked to directly.

 

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