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The Royal College of Psychiatrists Improving the lives of people with mental illness

 

एन्टीडिप्रसेन्ट क्या होती है

Antidepressants

 

 

 

एन्टीडिप्रसेन्ट एक प्रकार की दवाई है जो कि अवसाद के लक्षणों से छुटकारा देती हैं। यह 1950 में पहली बार विकसित की गई थी और तब से नियमित रूप से प्रयोग में आ रही है। आज लगभग 30 विभिन्न प्रकार की एन्टीडिप्रसेन्ट उपलब्ध है। जिन्हें निम्नलिखित वर्गो मे बांटा जा सकता है।

 

 

ट्राइसाइक्लिक

 

एम0ए0ओ0 इनहिबिटर (मोनो एमीन आक्सीडेज इनहिबिटर)

 

एस0एस0आर0आई0 (सेलेक्टिव सेरेटोनिन री-अपटेक इनहिबिटर)

 

एस0एन0आर0आई0 (सेरेटोनिन एण्ड नारएड्रीनलीन री-अपटेक इनहिबिटर)

 

एन0ए0एस0एस0ए0 (नारएड्रीनलीन एण्ड स्पेसिफिक सेरेटोनिनर्जिक एन्टीडिप्रेसेन्टस)

 

 

ये किस तरह कार्य करती है?

यद्यपि इसके बारे में कुछ निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन ये माना जाता है कि एन्टीडिप्रसेन्ट अपना प्रभाव मस्तिष्क में कुछ विशेष प्रकार के रसायनों, जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर कहते है, की क्रियाशीलता को बढ़ाकर दिखाते है। न्यूरोट्रांसमीटर मस्तिष्क में एक कोशिका से दूसरी कोशिका के बीच संदेश पहुँचाने का कार्य करते है। अवसाद की बीमारी के लिए प्रमुख रूप से सेरोटोनिन एवं नारएड्रिनेलिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर जिम्मेदार होते है।

 

एण्टीडिप्रसेन्ट के उपयोग क्या है?

  1. मध्यम से गंभीर अवसाद
  2. गंभीर घबराहट और पैनिक अटैक
  3. ओब्सेसिव कम्पलसिव डिसआर्डर (ओ.सी.डी.)
  4. पुराना दर्द
  5. ईटिंग डिसआर्डर
  6. पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर

यदि आप इस बारे में निश्चित नहीं है कि आपको एण्टीडिप्रसेन्ट लेने का सुझाव क्यों दिया गया है तो अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें।

 

ये कितनी अच्छी तरह काम करते है?

तीन महीने के इलाज के बाद 50 से 65%  अवसाद ग्रसित रोगियों में सुधार देखा जाता है जबकि इसकी तुलना में केवल 25-30% अवसाद ग्रसित रोगी अक्रियाशील गोलियो/प्लेसिबो से लाभ प्राप्त करते है। यद्यपि यह आश्चर्यजनक प्रतीत होता है कि प्लेसिबो से भी रोगी बेहतर होते है लेकिन ऐसा सभी दवाइयों यहां तक कि दर्द निवारक गोलियों के साथ भी होता है। एण्टीडिप्रसेन्ट प्रभावकारी होते है। हालांकि कुछ प्रभाव प्लेसिबो इफेक्ट के कारण भी होता है, जैसे कि अन्य दवाओं के साथ भी होता है।

 

क्या नये एण्टीडिप्रसेन्ट पुरानों से बेहतर है?

हां भी और नहीं भी, पुरानी दवायें (ट्राइसाइक्लिकस) नयी दवाओं (एस0एस0आर0आई0) जैसी ही प्रभावी है लेकिन नयी गोलियों के दुष्प्रभाव कम होते है। नयी गोलियों का एक बड़ा लाभ यह है कि वे इतनी खतरनाक नहीं है अगर कोई इसे जरूरत से ज्यादा लेता है।

 

क्या एण्टीडिप्रसेन्ट के दुष्प्रभाव होते है?

हां, आपका चिकित्सक आपको इसके बारे में सलाह देगा। आपको अपने चिकित्सक को किसी भी शारीरिक बीमारी, जो आपको अभी है या अतीत में थी, के बारे में अवश्य याद दिलाना चाहिए । नीचे सूचीबद्ध  दुष्प्रभाव दिए गये है जो आप विभिन्न प्रकार के एण्टीडिप्रसेन्ट का प्रयोग करने पर अनुभव कर सकते है।

 

ट्राइसाइक्लिकस

ये आमतौर पर मुंह का सूखना, मामूली कम्पन, तेज दिल की धड़कन, कब्ज, सुस्ती और वजन मे बढोत्तरी करते है। विशेष रूप से वृद्ध व्यक्तियों मे मतिभ्रम, मूत्र शुरू करने व रोकने में समस्या, चक्कर, बेहोशी (निम्न रक्तचाप के कारण) एवं अचानक गिर जाना जैसे लक्षण हो सकते हैं। यदि आपको हृदय संबन्धी समस्या है तो बेहतर है कि आप इन दवाइयों का सेवन न करें। पुरूषों में लिंग में तनाव संबंधी समस्यायें या दीर्घ स्खलन हो सकता है। ट्राइसाइक्लिक ज्यादा मात्रा में  खतरनाक है।

 

एस0एस0आर0आई0

ये दवायें शुरूआत के एक-दो सप्ताह लेने पर आप स्वयं को बीमार या ज्यादा उलझन में महसूस कर सकते हैं। कुछ दवायें अपच की शिकायत कर सकती है। लेकिन यह समस्या दवाई को भोजन के साथ लेने पर खत्म हो सकती है। ज्यादा गम्भीर बात यह है कि ये दवायें यौन क्रियाओं में समस्या कर सकती है। कुछ उत्तेजना के क्षणिक मामले पाये गये है, हालांकि ये बहुत कम होते है। दुष्प्रभावो की सूची काफी ज्यादा चिन्तित कर सकती है और दवाई के साथ आने वाले पत्रक पर और भी ज्यादा दुष्प्रभाव लिखे होते है, लेकिन ज्यादातर लोगो में बहुत कम व हल्के दुष्प्रभाव होते है। यह दुष्प्रभाव सामान्यतः कुछ सप्ताह के अंदर समाप्त हो जाते हैं। अपने साथ पूरी सूची रखना आवश्यक है ताकि दुष्प्रभाव होने पर आप उन्हें पहचान सकें। फिर आप इनके बारे में अपने चिकित्सक से बात कर सकते हैं। अधिक गंभीर समस्यायें जैसे पेशाब करने में कठिनाई, याद करने में परेशानी, गिरना, भ्रम, स्वस्थ व कम उम्र के लोगों में ज्यादा नहीं होती है। यदि आप उदास है तो स्वयं को चोट पहुँचाने या आत्महत्या के विचार आना सामान्य बात है। इस बारे में अपने चिकित्सक को अवश्य बतायें। जब अवसाद ठीक होना शुरू होता है तो आत्महत्या के विचार चले जाते हैं।

 

एस0एन0आर0आई0

एस.एस.आर.आई. के साइड इफेक्ट की तरह ही एस.एन.आर.आई. के साइड इफेक्ट है। परन्तु यदि किसी को कोई गम्भीर दिल की समस्या हो तो उन्हे वेनलाफेक्सिन नामक दवा को नहीं लेना चाहिए। यह रक्तचाप को भी बढ़ा सकती है, इसलिए इस पर नजर रखने की आवश्यकता हो जाती है।

 

एम000इनहिबिटर

इस प्रकार के एण्टीडिप्रसेन्ट (माओ इनहिबिटर) आज कल बहुत कम प्रयोग होते हैं। यदि आप टायरेमीन नामक पदार्थ युक्त खाद्य सामग्रियो का सेवन कर रहे हैं तो एम.ए.ओ. इनहिबिटर आपके रक्तचाप को खतरनाक रूप से बढ़ा सकते हैं। यदि आप माओ इनहिबिटर एण्टीडिप्रसेन्ट लेने के लिए सहमत हो जाते है तो चिकित्सक आपको कुछ खाद्य पदार्थो का सेवन न करने की एक सूची दे देगें।

 

एन00एस0एस00

इसके साइडइफेक्ट एस.एस.आर.आई. की तरह है। इससे सुस्ती, वजन बढने की समस्या हो सकती हैं लेकिन यौन समस्यायें कम होगी।

 

गाड़ी चलाने या मशीन के संचालन के बारे में

कुछ एण्टीडिप्रसेन्ट आपको सुस्त और आपकी प्रतिक्रियाओं को धीमी कर देते है। पुरानी दवाइयों से यह अधिक होने की सम्भावना है। कुछ दवाइयों के प्रयोग से गाड़ी चलाने में कोई समस्या नही आती। याद रखें, अवसाद आपकी एकाग्रता के साथ ही हस्तक्षेप कर सकता है। जिससे दुर्घटना होने की सम्भावना बढ़ सकती है। अगर आप किसी शंका में हो तो अपने चिकित्सक से जांच करायें।

 

क्या एण्टीडिप्रसेन्ट दवाएं लेने से उनकी आदत पड़ जाती है?

जिस प्रकार किसी व्यक्ति को ट्रंक्यूलाइजर्स, शराब या तम्बाकू की लत पड़ जाती है उस तरह एण्टीडिप्रसेन्ट दवाइयों की आदत नहीं पड़ती है क्योंकि आपको वही प्रभाव पाने के लिए लगातार मात्रा नहीं बढ़ानी पडती। यदि आप इनको लेना बन्द करते है तो आपको इनको लेने की इच्छा या क्रेविंग नहीं होती। हालाकि एक तिहाई लोग जो एस0एस0आर0आई0 और एस0एन0आर0आई0 को रोक देते है उनमें विदड्राल लक्षण पाये जाते है जो कि दो हफ्ते से दो महीने तक रह सकते है ये लक्षण निम्नलिखित हैः-

 

  1.  सपने या बुरे सपने        
  2.  पेट खराब होना 
  3.  इनफ्लूएजा के तरह लक्षण
  4. चिन्ता उलझन
  5. चक्कर आना   
  6. बिजली के झटके की तरह शरीर मे अनुभव 

 

ज्यादातर लोगों में ये विदड्राल प्रभाव हल्के होते है लेकिन कुछ लोगों में ये बहुत गंभीर हो सकते है। पेरोक्सिटीन और वेनलाफेक्सिन नामक दवाओं से ऐसा होने की सम्भावना ज्यादा होती है। इसलिए सामान्यतः एण्टीडिप्रसेन्ट दवाओं को इनकी मात्रा को धीरे-धीरे कम करना बेहतर रहता है। कुछ लोग ऐसा बताते है कि कई महीनों तक एण्टीडिप्रसेन्ट लेने के बाद जब वो इसे बन्द करते है तो उनको विभिन्न समस्यायें आती है। जिस कारण उनको लगता है कि उनको दवाईयों की लत पड़ गयी है। हालांकि ज्यादातर डाक्टरों का कहना है कि ऐसा पूर्ववर्ती समस्या/बीमारी के लौट आने के कारण होता है। ब्रिटेन में दवाईयों की सुरक्षा समिति ने 2004 में साक्ष्यो की समीक्षा का यह निष्कर्ष निकाला कि इस बात के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि एस0एस0आर0आई0 व अन्य एण्टीडिप्रसेन्ट अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्डों के अनुसार नशे की आदत डालती है।

 

एस0एस0आर0आई0, एण्टीडिप्रसेन्ट, आत्महत्या की भावनायें एवं युवा लोग

इस बात के कुछ प्रमाण मिले हैं कि युवा लोगों में एण्टीडिप्रसेन्ट का सेवन करने पर आत्महत्या के विचार (हालांकि वास्तविक प्रयास नहीं) और अन्य दुष्प्रभाव बढ़ जाते है। इसलिए एस0एस0आर0आई0 एण्टीडिप्रसेन्ट को 18 वर्ष से कम आयु मे इस्तेमाल के लिए लाइसेन्स प्राप्त नहीं है। हालाकि नेशनल इंस्टीट्यूट आफ क्लिनिकल एक्सीलेन्स का कहना है कि फ्लुआक्सटीन जो कि एक एस0एस0आर0आई0 एण्टीडिप्रसेन्ट है, 18 वर्ष से कम आयु के लोगों मे प्रयोग मे लाई जा सकती है। इस बात के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। 18 वर्ष या अधिक आयु के लोगों मे आत्म नुकसान या आत्महत्या के विचार बढ़ जाते है। लेकिन अलग-अलग लोगों मे परिपक्वता विभिन्न समय मे आती है। युवा लोगों मे आत्महत्या की संभावना बुजुर्ग लोगों की तुलना मे ज्यादा होती है इसलिए इन लोगों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए अगर ये एस.एस.आर.आई. एण्टीडिप्रसेन्ट लेते है।

 

गर्भावस्था के बारे मे

अगर आप गर्भवती है तो इससे बेहतर है आप जितना हो सके कम से कम दवाइयां लें। हालाकि यदि आपको इनकी अधिक जरूरत हो तो इसके नुकसान व फायदों के बारे में अपने डाक्टर से चर्चा करें। ऐसी स्थिति में कई सारे बिन्दुओं पर विचार करना होता है। उदाहरण के लिए -

 

  1.  पहले आपकी समस्या कितनी गंभीर थी।
  2.  आप और आपके होने वाले बच्चे पर क्या संभावित प्रभाव हो सकता है।
  3.  एण्टीडिप्रसेन्ट की समयानुसार गर्भावस्था में सुरक्षा।
  4.  कुछ अन्य विकल्प जैसे कि काग्नेटिव बिहैवियर थेरेपी।

 

ज्यादा जानकारी के लिए आप हमारी पुस्तिका मेन्टल हेल्थ इन प्रेग्नेन्सी देखें।

 

स्तनपान के बारे में।

कई महिलाएं जब एण्टीडिप्रसेन्ट दवाईयों का सेवन करते हुए स्तनपान कराती है, लेकिन इस बारे में भी अपने  चिकित्सक से विचारविमर्श  करना चाहिए। जैसा कि पूर्व समस्याओं के बारे में कहा गया है, आपको निम्न बिन्दुओं के बारे में सोचना आवश्यक है।

  • स्तनपान के लाभ
  • किस मात्रा मे एण्टीडिप्रसेन्ट दूध मे स्रावित होते है?
  •  बच्चे के जन्म के बाद दूसरी दवाई बदलने पर पुनः बीमार होने की कितनी सम्भावना है?
  •  क्या आपका बच्चा समय से पहले (प्रिमेच्योर) का है या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या से ग्रसित है।

 

शिशु के बारे में

शिशु को मां के दूध के जरिये दवा की काफी कम मात्रा प्राप्त होती है जन्म के कुछ ही हफ्तों के बाद शिशु के गुर्दे व यकृत काफी विकसित हो जाते है और वे वयस्कों के समान ही दवा को छोटे पदार्थो में तोड़ने एवं उससे छुटकारा पाने में सक्षम होते है। अतः बच्चे के लिए खतरा काफी कम होता है। कुछ एण्टीडिप्रसेन्ट जैसे कि इमिप्रामिन, नारट्रिपटिलिन और सरट्रालीन माँ के दूध में बहुत कम मात्रा में स्रावित होती है। अतः इस बारे में अपने चिकित्सक या फार्मासिस्ट से बात करना आवश्यक है।

 

एण्टीडिप्रसेन्ट को किस तरह लेना चाहिए?

शुरूआती कुछ सप्ताह अपने चिकित्सक के लगातार सम्पर्क में रहे। कुछ पुरानी दवायें जैसे कि ट्राइसाइक्लिक एण्टीडिप्रसेन्ट को बेहतर है कि शुरूआत में कम मात्रा मे लिया जाये, फिर धीरे-धीरे उनकी मात्रा को बढ़ाया जाये। यदि आप अपने डाक्टर से परामर्श लेने नहीं जाते है तो हो सकता है कि आप दवाई की अपर्याप्त मात्रा लेते रहें। एस.एस.आर.आई. एण्टीडिप्रसेन्ट के साथ यह प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं होती है। सामान्यतः ये दवाईयां उसी मात्रा मे शुरू की जाती है जिस मात्रा मे आपको बाद में भी लेना होता है। कभी भी प्रस्तावित मात्रा से ज्यादा मात्रा मे दवा खाने से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त लाभ नहीं होता है। अगर आपको कुछ दवाओं से दुष्प्रभाव होते है तो भी कोशिश करें कि दवा न बन्द हो क्योंकि उनमें से ज्यादातर कुछ दिनों में स्वतः ही खत्म हो जाते है। दवा को तब तक बन्द न करें जब तक की दुष्प्रभाव अत्यंत ज्यादा न हो। अगर ऐसा हो तो शीघ्र ही अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें। अगर आपको और ज्यादा खराब लगता है तो अपने चिकित्सक को अवश्य बतायें ताकि वह सही निर्णय ले सके कि दवा

 

आपके लिए उपयुक्त है या नहीं। आपका चिकित्सक आपसे यह भी जानना चाहेगा कि कही आपको उत्तेजना अथवा ज्यादा बैचैनी (रेस्टलेसनेस) की समस्या तो नहीं होती है।

 

उनको लगातार रोजाना ले- अगर आप ऐसा नहीं करते है तो ये अपना प्रभाव नहीं दिखायेगी।

 

  •  दवाओं को अपना प्रभाव दिखाने का समय दें। ये दवाईयां एकदम असर नहीं करती है। ज्यादातर लोगों में ये दवायें एक-दो सप्ताह में अपना प्रभाव दिखाना शुरू करती है और पूरा प्रभाव आने में छः हफ्ते तक का समय लग जाता है।
  • दवाओं को लगातार लीजिये, दवा जल्दी बन्द करने के कारण अक्सर लोग पूरी तरह ठीक नहीं हो पाते और अवसाद रोग पुनः आ जाता है।
  •  शराब का सेवन न करें। शराब न सिर्फ आपकी बीमारी को और गम्भीर बना देती है, बल्कि एण्टीडिप्रसेन्ट दवाइयों के साथ लेने पर ये आपको सुस्त और उनींदा कर देती है।
  • इन्हें बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • अगर आप के मन में ज्यादा गोलियां लेकर आत्महत्या करने के विचार आ रहे है तो शीघ्र अति शीघ्र अपने चिकित्सक को बतायें एवं अपनी दवाईयां किसी और व्यक्ति की सुरक्षा में रखें।
  •  अगर दवा की मात्रा बदलने पर कोई विशेष बदलाव आप महसूस कर रहे है तो उसके बारे में अपने डाक्टर को बताये।

 

कितने समय तक मुझे ये दवायें लेनी होगीं?

यह जरूरी नहीं कि एण्टीडिप्रसेन्ट अवसाद के कारण को ठीक कर दे या अवसाद को पूर्णतया खत्म कर दे। बिना किसी दवा के भी ज्यादातर अवसाद की बीमारी लगभग 8 महीनों मे ठीक होने लगती है। अगर आप 8 या 9 महीने से पहले दवा बन्द करते है तो यह सम्भावना है कि अवसाद के लक्षण पुनः लौट आये। वर्तमान धारणा यह है कि जब आप बेहतर महसूस करने लगें तो कम से कम उसके 6 महीने बाद तक दवा लें। यह सोचना भी आवश्यक है कि किन कारणों ने आपको अवसाद के लिए संवेदनशील बनाया है या आपके अवसाद के होने कारण क्या है? इस प्रकार अवसाद के दुबारा होने की संभावना को कम कर सकते है। यदि आपको 2 या अधिक अवसाद के एपीसोड हुए है तो इलाज कम से कम दो साल तक चलाना चाहिए।

 

यदि अवसाद पुनः वापस आ जाये तब क्या?

कुछ लोगो को गहन अवसाद की बीमारी बार-बार होती है। ऐसे मरीजो को एण्टीडिप्रसेन्ट दवाएं ठीक होने के पश्चात भी कई वर्षों तक लेनी होती है ताकि अवसाद रोग को पुनः होने से रोका जा सके। ऐसा वृद्ध लोगों में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उनमें अवसाद रोग कई बार होने की संभावना ज्यादा रहती है, कुछ लोगों के लिए अन्य दवाओं जैसे लिथियम की जरूरत पड़ सकती है। दवाओं के अतिरिक्त साइकोथेरेपी भी सहायक हो सकती है।

 

क्या होगा यदि मैं दवायें न लूं?

ऐसा कहना काफी मुश्किल है, बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि ये दवाइयां आपको क्यों लिखी गई है। आपका अवसाद रोग कितना गहन है और कितने दिनों से है? सामान्यतः अवसाद प्राकृतिक रूप से लगभग 8 महीनों मे ठीक हो जाता है। यदि आपका अवसाद रोग गंभीर नही है तो बेहतर है कि कुछ अन्य चिकित्सा पद्धतियां जो कि इस पुस्तिका में बताई गयी है, का उपयोग करें। यदि आप निर्णय नहीं ले पा रहें है तो अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें।

 

अवसाद के लिए उपलब्ध अन्य चिकित्सा पद्धतियां

केवल दवाएं लेना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि आप स्वयं को बेहतर महसूस करने के तरीके खोंजे ताकि आपके पुनः अवसाद ग्रस्त होने की संभावना कम रहे। इन तरीकों मे किसी से बातचीत करना, नियमित व्यायाम करना, कम शराब पीना, ठीक व पोषक  भोजन करना, स्वयं को आराम देने के लिए स्वयं-सहायक तरीके एवं अवसाद करने वाली समस्याओं के निवारण के सही तरीके को ढूंढ़ना शामिल है। स्वयं सहायता के तरीको के बारे में अवसाद के बारे में हमारी पुस्तिका को देखें।

 

टाकिंग ट्रीटमेन्ट (बातचीत के जरिये इलाज)

अवसाद के लिए कई प्रकार की वार्तालाप आधारित चिकित्सा उपलब्ध है। काउन्सलिंग हल्के अवसाद के लिए है। समस्या को सुलझाने के तरीके उस दशा में सहायक है जब अवसाद का कारण जीवन की समस्यायें है। सी.बी.टी. अवसाद की चिकित्सा के लिए विकसित की गई है और यह आपके स्वयं, दुनिया व अन्य लोगों के प्रति दृष्टिकोण को बेहतर बनाने मे सहायता करती है।

 

हर्बल रेमेडीज(जड़ी बूंटी द्वारा चिकित्सा)

हाइपरक्यूम नामक एक औषधि अवसाद की चिकित्सा के लिए है। यह सेन्ट जोन्सवार्ट नामक शाक (पौधे) से बनाया जाता है और यह बिना चिकित्सक के पर्चे के भी उपलब्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह एण्टीडिप्रसेन्ट की तरह ही कार्य करता है और कुछ लोगों ने यह पाया है कि इसके दुष्प्रभाव कम होते है। परन्तु एक समस्या यह है कि यह अन्य दवाइयों के कार्य करने के तरीके में छेडछाड़ बाद में कर सकता है। यदि आप और दवाइयां ले रहे है तो इसके बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

 

प्रकाश

ऐसा हो सकता है कि आप स्वयं को हर सर्दी मे उदास पायें और जिन दिनों सूर्य निकलता हो आप बेहतर महसूस करें। इस अवस्था को सीजनल ऐफेक्टिव डिसआर्डर कहते हैं। यदि ऐसा है तो आपके लिए एक प्रकाश बक्सा (लाइट बाक्स) सहायक हो सकता है। यह तीव्र प्रकाश का एक स्रोत होता है जो कि आपको प्रत्येक दिन निश्चित समय के लिए प्रयोग करना होता है और इस प्रकार ये सर्दियो मे प्रकाश की कमी पूरी करता है।

 

 

एण्टीडिप्रसेन्ट इन अन्य चिकित्साओं की तुलना मे कैसी है?

हाल के अध्ययन इस बात की ओर इशारा करते है कि एक साल के उपरान्त ज्यादातर साइकोथेरेपी उतनी ही प्रभावकारी है जितनी कि एण्टीडिप्रसेन्ट दवाइयां। सामान्यतः यह माना जाता है कि एण्टीडिप्रसेन्ट तेजी से कार्य करती है। कुछ अध्ययन यह सलाह देते है कि साइकोथेरेपी एवं एण्टीडिप्रसेन्ट एक साथ सबसे बेहतर है। दुर्भाग्य से इनमें से कुछ चिकित्सायें देश के कुछ भागों में एन.एच.एस. के अन्तर्गत आसानी से उपलब्ध नहीं है। हाइपरक्यूम या सेन्ट जान बार्ट एक एण्टीडिप्रसेन्ट के रूप में जर्मनी में बहुत उपयोग होता है। यह हल्के अवसाद में एण्टीडिप्रसेन्ट जितना ही प्रभावकारी है। हालांकि मध्य या गंभीर अवसाद में इसकी उपयोगिता के बारे में बहुत ही कम प्रकाशित तथ्य है। व्यायाम और सी.बी.टी. पर आधारित स्वयं सहायता की पुस्तिकायें अवसाद का प्रभावशाली इलाज हो सकते है। यदि आपके पास कुछ और एण्टीडिप्रसेन्ट के बारे में प्रश्न है तो आगे बढने के अनुभाग को देखें तथा चिकित्सक या मनोचिकित्सक से बात करें। यह भी बेहतर है कि आप अपने परिवार एवं मित्रों से इन चीजों के बारे में बातें करें।

 

 

For a list of references and further reading visit the English version of this leaflet.

 


 

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The original leaflet was produced by the RCPsych Public Education Editorial Board.

Series Editor: Dr Philip Timms.

Hindi Adaptation by Dr Anuradha Nischal, Dr Adarsh Tripathi & Dr Anju Agarwal.

Reviewed by Dr Anil Nischal & Dr Ashok Kr. Jainer

Date of original leaflet: September 2010.  Date of translation: November 2011

© November 2011 Royal College of Psychiatrists. This leaflet may be downloaded, printed out, photocopied and distributed free of charge as long as the Royal College of Psychiatrists is properly credited and no profit is gained from its use. Permission to reproduce it in any other way must be obtained from the Head of Publications. The College does not allow reposting of its leaflets on other sites, but allows them to be linked to directly.

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