अभिघातजन्य तनाव विकार (पीटीएसडी)

Post-traumatic stress disorder (PTSD)

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यह जानकारी ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए है जो अभिघातजन्य तनाव विकार (पीटीएसडी) का अनुभव कर रहा है या जो किसी ऐसे व्यक्ति को जानता है।

पीटीएसडी क्या है?

अभिघातजन्य तनाव विकार (पीटीएसडी) एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो तब उत्पन्न हो सकती है जब कोई व्यक्ति किसी दर्दनाक घटना के संपर्क में आता है।

बहुत से लोग जो किसी दर्दनाक घटना से गुज़रते हैं वे नकारात्मक भावनाओं, विचारों और यादों का अनुभव करेंगे। हालाँकि अधिकांश लोग समय के साथ बेहतर महसूस करेंगे। जब ये नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ दूर नहीं होती हैं और किसी के दैनिक जीवन में हस्तक्षेप करती हैं, तो वे पीटीएसडी से पीड़ित हो सकते हैं।

पीटीएसडी का क्या कारण है?

पीटीएसडी किसी को भी प्रभावित कर सकता है और यह तब होता है जब क‍िसी का सामना सच में या जोख‍िम के रूप में इनसे होता है :

  • मौत
  • गंभीर चोट
  • यौन हिंसा

उनका सामना निम्नलिखित में से किसी एक तरीके से हो सकता है:

  • प्रत्यक्ष रूप से – यह उनके साथ हुआ हो
  • साक्षी – उन्होंने किसी और के साथ वह होता हुआ देखा हो
  • जानकारी – उन्हें पता चला कि यह उनके किसी बहुत क़रीबी के साथ हुआ था
  • बार-बार सामना – वे ख़ुद दर्दनाक घटनाओं के संपर्क में बार-बार आए हैं या दूसरों को बार-बार प्रभावित करने वाली दर्दनाक घटनाओं का अनुभव किया है। हम यह भी जानते हैं कि कुछ लोग जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, टेलीविजन, फिल्मों या कार्यस्थल पर चित्रों के माध्यम से दर्दनाक घटनाओं के संपर्क में आते हैं, उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का अनुभव हो सकता है।

दर्दनाक घटनाओं के उदाहरणों में शामिल हो सकते हैं:

  • हिंसक मौत का साक्षी होना
  • गंभीर दुर्घटनाएं, जैसे, कार दुर्घटना
  • शारीरिक या यौन हमला
  • गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं या गहन देखभाल में होना
  • जटिल प्रसव के अनुभव
  • एक जानलेवा बीमारी का निदान होना
  • युद्ध और संघर्ष
  • आतंकवादी हमले
  • प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदाएं, जैसे सुनामी या आग

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में ऐसी घटनाएं शामिल नहीं हैं जो पीटीएसडी का कारण बन सकती हैं। यदि आपका अनुभव यहाँ शामिल नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको मदद और सहयोग नहीं लेना चाहिए।

दर्दनाक घटनाएँ इतनी चौंकाने वाली क्यों होती हैं?

दर्दनाक घटनाएँ चौंकाने वाली होती हैं क्योंकि हम उनका कोई मतलब नहीं निकाल सकते हैं। वे हमारी इस समझ से मेल नहीं खाती हैं कि दुनिया कैसी होनी चाहिए।

दर्दनाक घटनाएँ अक्सर 'यादृच्छिक' प्रतीत होती हैं या उनका कोई स्पष्ट कारण नहीं होता है। दुनिया कैसी होनी चाहिए, इस बारे में वे हमारे विचारों से मेल नहीं खाती हैं जिससे हमारे लिए उनमें छ‍िपे अर्थ को समझना मुश्किल हो सकता है।

दर्दनाक अनुभव हमें यह भी दिखाते हैं कि हमारे और जिन लोगों की हम परवाह करते हैं उनके साथ किसी भी समय बुरी चीजें हो सकती हैं। इससे हमें असुरक्षित और खतरा महसूस हो सकता है जो कि काफी भयावह है। कभी-कभी दर्दनाक घटनाएं हमें यह सवाल करने पर मजबूर कर सकती हैं कि हम कौन हैं, जो विक्षुब्ध करने वाला भी हो सकता है।

क्या होता है जब किसी को पीटीएसडी होता है?

बहुत से लोग जीवन भर दर्दनाक घटनाओं का अनुभव करेंगे। इंग्लैंड में लगभग एक तिहाई वयस्कों ने अपने जीवनकाल में कम से कम एक दर्दनाक घटना का अनुभव किया है। हालांकि दर्दनाक घटना का अनुभव करने वाले हर व्यक्ति को पीटीएसडी नहीं होगा।

बहुत से लोग किसी दर्दनाक अनुभव के बाद दुःख, उदासी, चिंता, अपराधबोध और क्रोध का अनुभव कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को पीटीएसडी है। जिन लोगों को पीटीएसडी होता है उनमें अक्सर निम्नलिखित लक्षण होते हैं। ये तुरंत शुरू हो सकते हैं, या इन्हें शुरू होने में कुछ सप्ताह या महीने भी लग सकते हैं।

पीटीएसडी के साथ, ये लक्षण आपकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में हस्तक्षेप करेंगे और/या आपको बेहद व्यथित महसूस कराएंगे। यदि किसी दर्दनाक घटना के तुरंत बाद आपके पास इनमें से कोई भी लक्षण है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको पीटीएसडी होगा।

लक्षणों का पुनः अनुभव होना

  • यादें - घटना की अवांछित यादें, जिन्हें अंतर्वेधी विचार कहा जाता है, बहुत अभिभूत करने वाली और विक्षुब्ध करने वाली होती हैं।
  • सपने – किसी घटना के बारे में परेशान करने वाले सपने या बुरे सपने आना।
  • विघटनकारी प्रतिक्रियाएं - ऐसा महसूस करना या अभिनय करना जैसे कि दर्दनाक घटना फिर से हो रही है (फ्लैशबैक के रूप में जाना जाता है)। चरम स्थितियों में, आप अपने आस-पास क्या हो रहा है इसके बारे में जागरूक होना बंद कर सकते हैं।
  • शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कष्ट – ऐसी चीजों के संपर्क में आने पर जो आपको किसी तरह से घटना की याद दिलाती हैं, बहुत अधिक व्यथित और शारीरिक रूप से उत्तेजित महसूस करना (उदाहरण के लिए तेज़ साँस लेना, तेज़ नाड़ी)।

परिहार लक्षण

  • विघटनकारी भूलने की बीमारी – दर्दनाक घटना के कुछ हिस्सों को याद रखने में असमर्थ होना।
  • अलगाव – अलग महसूस करना या उन लोगों से अब करीब नहीं रहना जिनके आप पहले करीब महसूस करते थे।
  • बात करने और सोचने से बचना - दर्दनाक घटनाओं के बारे में बोलना या सोचना नहीं चाहता।
  • जुड़ाव से बचना – हो सकता है कि आप घटना से जुड़ी यादों, विचारों, भावनाओं, चीज़ों, लोगों और स्थानों से बचना चाहें। इसमें घटना के बारे में टीवी या अन्य मीडिया से बचना शामिल हो सकता है, खासकर यदि ऐसा करने से आपको व्यथा होती है।

मनोदशा के लक्षण

  • नकारात्मक मान्यताएँ और अपेक्षाएँ  – अपने बारे में, दूसरों के बारे में या दुनिया के बारे में नकारात्मक सोचना।
  • दोष देना – होने वाली दर्दनाक घटना या उसके परिणामों के लिए खुद को या अन्य लोगों को दोषी ठहराना।
  • नकारात्मक भावनाएँ – लगातार भय, डर, क्रोध, अपराधबोध या शर्म का अनुभव होना।
  • गतिविधियों में अरुचि – उन गतिविधियों में भाग न लेना या उनमें रुचि न लेना जिनका आप आनंद लेते थे या जिन्हें आप नियमित रूप से करने में सक्षम थे।
  • सकारात्मक भावनाओं को महसूस करने में असमर्थ खुशी, संतुष्टि या प्रेमपूर्ण भावनाओं का अनुभव करने में सक्षम नहीं होना।

सतर्कता और प्रतिक्रियाशीलता के लक्षण

  • अतिसतर्कता – आपके आस-पास क्या हो रहा है इसके बारे में अत्यधिक जागरूक रहना और आराम करने में असमर्थ होना।
  • आसानी से चौंक जाना – शोर या हरकतों पर अत्यधिक प्रतिक्रिया करना जो आपको दर्दनाक घटना की याद दिलाते हैं।
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई – उन कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना कठिन हो रहा है जिन पर आप पहले ध्यान केंद्रित करने में सक्षम थे।
  • सोने में कठिनाई सो जाना और सोते रहना मुश्किल हो रहा है। जब आप सो जाते हैं तो आपकी नींद ख़राब हो सकती है और आपको बुरे सपने आ सकते हैं।
  • चिड़चिड़ापन – आवेग में आना ज‍िसमें आप लोगों या चीज़ों के प्रति मौखिक या शारीरिक रूप से आक्रामक हो जाते हैं। ये आवेग किसी ऐसी बात के अनुभव के कारण हो सकते हैं जो आपको दर्दनाक घटना की याद दिलाती है।
  • लापरवाही – हान‍िकारक या आत्म-विनाशकारी कार्य करना।

पीटीएसडी क्यों होता है?

पीटीएसडी के कारणों के लिए कई संभावित स्पष्टीकरण हैं।

मनोवैज्ञानिक

पीटीएसडी के मनोवैज्ञानिक लक्षण बेहद अप्रिय और परेशान करने वाले हैं। हालाँकि ये लक्षण तब समझ में आ सकते हैं जब हम सोचते हैं कि किसी दर्दनाक घटना के बाद हमारा दिमाग हमारी रक्षा के लिए कैसे काम कर सकता है।

  • स्मृति – किसी दर्दनाक घटना का अनुभव करने के बाद हम उसे याद रखने में असमर्थ या अनिच्छुक हो सकते हैं। हालाँकि यह याद रखना कष्टकारी हो सकता है कि क्या हुआ है, ऐसा करने से हमें घटना को समझने में मदद मिल सकती है। यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।
  • अंतर्वेधी विचार या फ्लैशबैक इन्हें जो हुआ उसकी पुनरावृत्ति के रूप में देखा जा सकता है। वे हमें यह सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं कि क्या हुआ है ताकि अगर ऐसा दोबारा होता है तो हम बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। हालाँकि पीटीएसडी में ये विचार हमें केवल व्यथित महसूस कराते हैं।
  • टालना और संवेदनहीन होना – किसी आघात को याद करना थका देने वाला और परेशान करने वाला होता है। टालना और संवेदनहीन होना आपको जो हुआ उसके बारे में सोचना बंद करने में मदद कर सकता है। हालाँकि वे आपको अपने अनुभवों का अर्थ निकालने से भी रोकते हैं।
  • अतिसतर्कता – यदि हम 'सतर्क' हैं, तो हम एक और संकट आने पर तुरंत प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार महसूस कर सकते हैं। यह हमें किसी दुर्घटना या संकट के बाद आवश्यक कार्य के लिए ऊर्जा भी दे सकता है। हालाँकि यह थका देने वाला भी हो सकता है और हमें उन कामों को करने से रोक सकता है जिनका हम आनंद लेते थे।

शारीरिक

पीटीएसडी के साथ होने वाले कुछ शारीरिक लक्षण इसलिए होते हैं क्योंकि हमारा शरीर आघात को गलत तरीके से संसाधित करने का प्रयास कर रहा है।

  • एड्रेनालाईन – यह एक हार्मोन है जो हमारे शरीर में तब उत्पन्न होता है जब हम तनाव में होते हैं। यह हमारे शरीर को उन गतिविधियों के लिए तैयार करने में मदद करता है जिनमें बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उदाहरण के लिए दौड़ना या किसी से लड़ना। जब तनाव गायब हो जाए, तो एड्रेनालाईन का स्तर वापस सामान्य हो जाना चाहिए। पीटीएसडी में तनावपूर्ण घटना की जीवंत यादें एड्रेनालाईन के स्तर को ऊंचा रख सकती हैं। एड्रेनालाईन का उच्च स्तर आपको तनावग्रस्त, चिड़चिड़ा और आराम करने या अच्छी नींद लेने में असमर्थ बना सकता है।
  • हिप्पोकैम्पस यह मस्तिष्क का एक हिस्सा है जो यादों को संसाधित करता है। एड्रेनालाईन जैसे तनाव हार्मोन का उच्च स्तर इसे ठीक से काम करने से रोक सकता है। इसका मतलब यह है कि दर्दनाक घटना की यादें संसाधित नहीं होती हैं। इससे आप घटना को ऐसे याद रख सकते हैं जैसे जोखिम अभी भी मौजूद है, न कि इसे अतीत में हुई किसी घटना के रूप में देखें। 

क्या ऐसे कार्यक्षेत्र हैं जहां किसी को पीटीएसडी होने की अधिक संभावना है?

यदि किसी को भी किसी दर्दनाक घटना का अनुभव हुआ हो तो उसे पीटीएसडी हो सकता है। कुछ लोग ऐसे काम करते हैं जिनमें उन्हें काम के दौरान दर्दनाक घटनाओं का अनुभव करने की अधिक संभावना होती है। इसका मतलब यह है कि उनमें पीटीएसडी विकसित होने का जोखिम अन्य कार्यक्षेत्रों की तुलना में अधिक है। इन कामों में शामिल हो सकते हैं:

  • आपातकालीन सेवा कर्मचारी (जैसे पुलिस, अग्न‍िशमन दल या रोगीवाहन कर्मचारी)
  • सामाजिक कार्यकर्ता
  • गहन देखभाल कर्मचारी
  • सैन्य कर्मी और युद्ध क्षेत्रों में काम करने वाले अन्य लोग

पीटीएसडी कब प्रारंभ होती है?

पीटीएसडी के लक्षण किसी दर्दनाक घटना के तुरंत बाद, या उसके हफ्तों या महीनों बाद भी शुरू हो सकते हैं। आमतौर पर लक्षण घटना के 6 महीने के भीतर शुरू होते हैं। कभी-कभी लक्षण 6 महीने के बाद शुरू होंगे, हालांकि ऐसा कम ही होता है। दुर्भाग्यवश बहुत से लोग लक्षण शुरू होने पर मदद नहीं मांगेंगे।

किसी दर्दनाक घटना के बाद पहले महीने में पीटीएसडी का निदान नहीं किया जा सकता है। यदि आप तुरंत आघात के लक्षणों का अनुभव करते हैं, और ये गंभीर हैं और आपको काम करने से रोकते हैं, तो आप 'तीव्र तनाव विकार' का अनुभव कर सकते हैं।

किसी दर्दनाक अनुभव के बाद हर किसी को पीटीएसडी क्यों नहीं होता?

एक दर्दनाक अनुभव के बाद, कई लोगों में पहले महीने या उसके आसपास आघात के कुछ लक्षण रहेंगे। इनमें से कई लक्षण वास्तविक या कथित खतरे का अनुभव करने की सामान्य प्रतिक्रियाएँ हैं। आप इन्हें अपने मस्तिष्क द्वारा आपको नुकसान से बचाने के तरीके के रूप में सोच सकते हैं।

हालाँकि अधिकांश लोग कुछ हफ़्तों के बाद, या कभी-कभी थोड़े लंबे समय के बाद, जो हुआ है, उसे संसाध‍ित करेंगे और उनके तनाव के लक्षण गायब होने लगेंगे।

शोध से पता चलता है कि कुछ समूहों के लोगों में पीटीएसडी विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि कोई यह कर सके तो पीटीएसडी विकसित होने का जोखिम कम हो जाता है:

  • सामाजिक सहयोग तक पहुंचें और
  • ‘कम तनाव वाले माहौल' में दर्दनाक घटना से उबरें।

किन घटनाओं के कारण पीटीएसडी होने की अधिक संभावना है?

कोई भी दर्दनाक घटना पीटीएसडी का कारण बन सकती है, हालांकि अनुभव जितना अधिक परेशान करने वाला होगा, आपके पीटीएसडी विकसित होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। उदाहरण के लिए, किसी को पीटीएसडी विकसित होने की अधिक संभावना है,यदि वह घटना :

  • अचानक और अप्रत्याशित है
  • लंबे समय तक चलती रहती है
  • तब घटित होती है जब आप फंंसे हो और निकल नहीं पाते
  • मानव निर्मित है
  • कई मौतों का कारण बनती है
  • अंगभंग का कारण बनती है
  • उसमें बच्चे शामिल होते हैं।

यदि आप तनाव और अनिश्चितता के संपर्क में रहते हैं, तो इससे आपके पीटीएसडी लक्षणों में सुधार होना अधिक कठिन हो जाएगा।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं किसी दर्दनाक अनुभव से कब उबर चुका हूँ?

आप शायद एक दर्दनाक घटना से उबर चुके होंगे अगर आप:

  • अत्यधिक व्यथित हुए बिना उसके बारे में सोच सकते हैं
  • लगातार खतरा महसूस न करे
  • अनुचित समय पर इसके बारे में न सोचें।

पीटीएसडी का हमेशा निदान क्यों नहीं किया जाता?

कई कारण हैं जिनकी वजह से पीटीएसडी वाले किसी व्यक्ति का निदान नहीं किया जा सकता है।

कलंक और गलतफहमी

पीटीएसडी से पीड़ित लोग अक्सर इस बारे में बात करने से बचते हैं कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं ताकि उन्हें दर्दनाक घटना के बारे में सोचना न पड़े।

कुछ लोगों को लगता है कि वे जिन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं (उदाहरण के लिए बचना और संवेदनहीन होना) वे उन्हें इससे निपटने में मदद कर रहे हैं, और उन्हें यह एहसास नहीं होता है कि वे पीटीएसडी के कारण उत्‍पन्‍न होते हैं।

जब कोई बहुत अस्वस्थ होता है, तो उसके लिए यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि वह उस दर्दनाक घटना से पहले जैसा महसूस कर रहा था, वैसा ही हो जाएगा। यह उन्हें मदद लेने से रोक लेता है।

एक आम ग़लतफ़हमी यह भी है कि केवल सशस्त्र बलों के लोगों को ही पीटीएसडी होता है। वास्तव में, पीटीएसडी किसी को भी हो सकता है, और पीटीएसडी का प्रत्येक अनुभव मान्य है।

 ग़लत निदान

पीटीएसडी वाले कुछ लोगों में व्यग्रता या अवसाद जैसी स्थितियों का गलत निदान हो सकता है। कुछ लोगों को अन्य मनोवैज्ञानिक या शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं होंगी, जिसका अर्थ है कि उनके पीटीएसडी पर किसी का ध्यान नहीं जाता है।

उनमें 'चिकित्सकीय रूप से अस्पष्टीकृत शारीरिक लक्षण' भी हो सकते हैं जैसे:

  • जठरांत्र संबंधी कठिनाइयाँ
  •  दर्द के लक्षण
  •  सिरदर्द

इन लक्षणों का मतलब यह हो सकता है कि उनके पीटीएसडी की पहचान किसी और चीज़ के रूप में की गई है।

अन्य चुनौतियाँ

पीटीएसडी वाले कुछ लोगों के सामने अन्य चुनौतियाँ भी हो सकती हैं, जैसे रिश्ते में कठिनाइयाँ या शराब या नशीली दवाओं पर निर्भरता। ये उनके पीटीएसडी के कारण हो सकते हैं, लेकिन पीटीएसडी से अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

क्या बच्चों को पीटीएसडी हो सकता है?

पीटीएसडी किसी भी उम्र में विकसित हो सकता है। वयस्कों में अनुभव होने वाले पीटीएसडी के लक्षणों के साथ-साथ बच्चे यह भी अनुभव कर सकते हैं:

  • डरावने सपने  – बच्चों में ये सपने वास्तविक दर्दनाक घटना को प्रतिबिंबित कर भी सकते हैं और नहीं भी कर सकते हैं ।
  • दोहराव वाला खेल कुछ बच्चे खेलते समय दर्दनाक घटना का अभिनय करेंगे। उदाहरण के लिए एक गंभीर सड़क दुर्घटना में शामिल बच्चा खिलौना कारों के साथ दुर्घटना को दोहरा सकता है। 
  • शारीरिक लक्षण – वे पेट दर्द और सिरदर्द की शिकायत कर सकते है।
  • डर है कि उनका जीवन जल्द ही समाप्त हो जाएगा – उन्हें यह विश्वास करना मुश्किल हो सकता है कि वे बड़े होने के लिए पर्याप्त समय तक जीवित रहेंगे।

पीटीएसडी के लिए उपचार क्या हैं?

पीटीएसडी के लिए कई अलग-अलग उपचार हैं, जिनमें आघात-केंद्रित संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार (टीएफ-सीबीटी), आई मूवमेंट डिसेन्सिटाइजेशन एंड रीप्रोसेसिंग (ईएमडीआर) और दवाएं शामिल हैं।

मनोचिकित्सा

पीटीएसडी के लिए मनोचिकित्सा आपके पिछले जीवन के बजाय दर्दनाक अनुभव पर ध्यान केंद्रित करेगी। वे निम्नलिखित बातों में आपकी सहायता करेंगे:

  • स्वीकृति यह स्वीकार करना सीखना कि यद्यपि जो हुआ है उसे आप बदल नहीं सकते, लेकिन आप घटना, दुनिया और अपने जीवन के बारे में अलग तरह से सोच सकते हैं।
  • घटना को याद रखना डर और परेशानी से अभ‍िभूत हुए बिना जो हुआ उसे याद रखना। आप अंतर्वेधी विचारों या पूर्वदृश्यों के बजाय जब चाहें तब, क्या हुआ था, इसके बारे में सोचने में सक्षम होंगे।
  • अपने अनुभवों को शब्दों में व्यक्त करना – जो कुछ हुआ उसके बारे में बात करना ताकि आपका दिमाग यादों को दूर रख सके, और अन्य बातों की ओर बढ़ सके।
  • अध‍िक सुरक्षित महसूस करना – आपको अपनी भावनाओं पर अधिक नियंत्रण महसूस करने में मदद करना। यह आपको अध‍िक सुरक्षित महसूस करने में मदद कर सकता है इसलिए आपको यादों से बचने की उतनी आवश्यकता नहीं होगी।

कोई भी मनोचिकित्सा किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा दी जानी चाहिए जो उचित रूप से प्रशिक्षित और मान्यता प्राप्त हो। सत्र आमतौर पर कम से कम साप्ताहिक होते हैं, एक ही चिकित्सक के साथ, और अक्सर कम से कम 8-12 हफ्तों तक चलते हैं।

हालाँकि सत्र आमतौर पर लगभग एक घंटे तक चलेंगे, कभी-कभी वे 90 मिनट तक चल सकते हैं।

पीटीएसडी के लिए उपचारों में शामिल हैं:

आघात-केंद्रित संज्ञानात्मक-व्यवहार चिकित्सा (टीएफ-सीबीटी)

यह एक वार्तालाप उपचार है जो आपके सोचने के तरीके को बदलने में आपकी मदद कर सकती है। समय के साथ यह आपको बेहतर महसूस करने और अलग व्यवहार करने में मदद कर सकता है। यह आम तौर पर एक-से-एक द‍िया जाता है, हालांकि कुछ सबूत हैं कि टीएफ-सीबीटी समूहों में भी द‍िया जा सकता है।

आई मूवमेंट डिसेन्सिटाइजेशन एंड रिप्रोसेसिंग(ईएमडीआर)

यह एक ऐसी तकनीक है जो मस्तिष्क को दर्दनाक यादों को संसाधित करने में मदद करने के लिए आंखों की गतिविधियों का उपयोग करती है।

आपसे उस दर्दनाक घटना और वह आपको कैसे सोचने और महसूस करने पर मजबूर करती है, यह याद करने को कहा जाएगा। जब आप ऐसा करते हैं, तो आपसे आंखों की हरकत करने या हाथ थपथपाने जैसी किसी प्रकार की 'द्विपक्षीय उत्तेजना' प्राप्त करने के लिए कहा जाएगा। यह दिखाया गया है कि यह एक दर्दनाक स्मृति के आसपास आपके द्वारा अनुभव की जाने वाली भावनाओं की तीव्रता को कम करता है जिससे आघात के ठीक होने में मदद मिलती है।

ईएमडीआर एक प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा द‍िया जाना चाहिए। ईएमडीआर आमतौर पर 8-12 सत्रों में द‍िया जाता है जो 60-90 मिनट तक चलता है।

वार्तालाप उपचार के कुछ अन्य रूप उन लोगों के लिए विशिष्ट लक्षणों (जैसे खराब नींद) को लक्षित करने में सहायक हो सकते हैं जो ईएमडीआर या टीएफ-सीबीटी से ठीक नहीं होते हैं।

दवाई

यदि आपने अपने पीटीएसडी के इलाज के लिए अन्य उपचारों की कोशिश की है और पाते हैं कि ये काम नहीं कर रहे हैं, तो आपका डॉक्टर आपको अवसादरोधी या एंटी-डिप्रेसंट लिख सकता है।

सलेक्‍ट‍िव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (एसएसआरआई) वे अवसादरोधी हैं जो पीटीएसडी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। यदि आप भी अवसाद का अनुभव कर रहे हैं, तो अवसादरोधी दवाएं इसमें मदद कर सकती हैं।

यदि एसएसआरआई आपके लिए काम नहीं करती है, तो आपको अन्य दवा की पेशकश की जा सकती है, लेकिन यह आमतौर पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर होना चाहिए।

कौन सा उपचार सबसे अच्छा काम करता है?

इस बात के प्रमाण हैं कि टीएफ-सीबीटी और ईएमडीआर सर्वोत्तम प्रथम-पंक्ति उपचार हैं। दवाएँ उन लोगों के लिए सहायक हो सकती हैं जो वार्तालाप उपचार नहीं चाहते हैं या जो उन तक आसानी से नहीं पहुँच सकते हैं।

मुझे पहले कौन सा उपचार लेना चाहिए?

जहां भी संभव हो, दवा से पहले आघात-केंद्रित मनोवैज्ञानिक उपचार (टीएफ-सीबीटी या ईएमडीआर) की पेशकश की जानी चाहिए। यह नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (एनआईसीई) के दिशानिर्देशों के अनुसार है।

मैं अपना सहयोग कैसे कर सकता हूँ?

यदि आपको पीटीएसडी है तो कुछ चीजें हैं जो आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य लाभ में सहायता के लिए कर सकते हैं। आपका चिकित्सक आपको इन चीज़ों में सहायता करने में मदद करेगा और सुनिश्चित करेगा कि आप उन्हें सही समय पर करें:

  • अपनी दिनचर्या को बनाए रखना – यदि संभव हो, तो अपनी सामान्य दिनचर्या पर वापस लौटने या बने रहने का प्रयास करें। अपने जीवन को यथासंभव सामान्य बनाए रखते हुए आप खुद को संभाल सकते हैं।
  • किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिस पर आप भरोसा करते हैं हालांकि आपको ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि जो कुछ हुआ उसके बारे में आपको किसी और के साथ बात करनी है, क‍िसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना आपकी भावनाओं को सुरक्ष‍ित ढंग से संसाध‍ित करने में मदद कर सकता है। यदि ऐसा करना बहुत परेशान करने वाला नहीं है तो किसी ऐसे व्यक्ति से बात करने से भी मदद मिल सकती है जिसने आपके जैसा ही अनुभव किया हो, या जिसने पहले भी इसी तरह की घटना का अनुभव किया हो ।
  • विश्राम व्यायाम आज़माएँ आराम करने के लिए स्‍वप्रेर‍ित ध्यान और अन्य व्यायाम आज़माएँ। पीटीएसडी के साथ आराम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए अपने चिकित्सक से उन व्यायामों या गतिविधियों के बारे में बात करें जो आपके लिए काम कर सकते हैं।
  • काम या स्कूल में वापस जाएँ यदि आप सक्षम महसूस करते हैं, तो काम, स्कूल या विश्वविद्यालय में वापस जाने से मदद मिल सकती है। इससे आपको दिनचर्या का एहसास हो सकता है। हालाँकि आपको उन स्थितियों से बचने की कोशिश करनी चाहिए जहाँ आपको आगे आघात या तीव्र तनाव का सामना करना पड़ सकता है। आम तौर पर, उपचार मिलने तक सहायक, कम तनाव वाले माहौल में काम करना सबसे अच्छा होता है।
  • नियमित रूप से खाएं और व्यायाम करें  – आप जब सामान्‍यतया खाते हैं तब खाने का प्रयास करें भले ही आपको भूख न लगी हो। यदि आप सक्षम महसूस करते हैं तो नियमित व्यायाम करने का प्रयास करें। जब आपके सोने का समय हो तो इससे आपको अधिक थकान महसूस करने में भी मदद मिल सकती है।
  • दूसरों के साथ समय बिताएं – जिन लोगों की आप परवाह करते हैं उनके साथ समय बिताने से आपको सहयोग की भावना मिल सकती है।
  • बेहतर होने की उम्मीद करें– इस विचार पर ध्यान केंद्रित करना कि आप अंततः बेहतर हो जाएंगे, आपके स्‍वास्‍थ्‍यलाभ के लिए अच्छा होगा। याद रखें कि जल्दी ठीक होने के लिए खुद पर दबाव न डालें।
  • जहां दर्दनाक घटना घटी थी, वहां वापस जाएं – केवल जब आप ऐसा करने में सक्षम महसूस करेंगे, तभी आप वहां वापस जाना चाहेंगे जहां दर्दनाक घटना घटी थी। यदि आप ऐसा करने की योजना बना रहे हैं तो अपने चिकित्सक या डॉक्टर से बात करें, ताकि वे इस कदम में आपका सहयोग कर सकें।

ऐसी कुछ चीज़ें भी हैं जिन्हें आप ठीक होने के दौरान करने में सावधानी बरतना चाहेंगे या सचेत रहना चाहेंगे। हालाँकि 'सही काम' करना वास्तव में चुनौतीपूर्ण हो सकता है और यदि आप खुद को इनमें से कोई भी काम करते हुए पाते हैं तो आपको दोषी महसूस नहीं करना चाहिए:

  • आत्म-आलोचना - पीटीएसडी के लक्षण कमजोरी का संकेत नहीं हैं। वे डरावने अनुभवों के प्रति एक सामान्य प्रतिक्रिया हैं।
  • अपनी भावनाओं को अपने तक ही सीमित रखें  यदि आपको पीटीएसडी है, तो अपने विचारों और भावनाओं को दूसरों के साथ साझा करने में दोषी महसूस न करें। आप कैसा महसूस कर रहे हैं इसके बारे में बात करना आपके ठीक होने में सहायता कर सकता है।
  • उम्मीद करना कि चीजें तुरंत सामान्य हो जाएंगी – पीटीएसडी के इलाज में समय लग सकता है। अपने आप से बहुत जल्दी बहुत अधिक अपेक्षा न करने का प्रयास करें।
  • दूसरे लोगों से दूर रहना – अकेले बहुत सारा समय बिताने से अलगाव की भावना बढ़ सकती है और आपको बुरा महसूस हो सकता है।
  • मद्यपान और धूम्रपान करना हालाँकि  शराब आपको आराम देने में मदद कर सकती है, लेकिन समय के साथ यह आपको बुरा महसूस करा सकती है। यदि आप पीटीएसडी से जुड़े लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं तो कॉफी और निकोटीन उत्तेजक के रूप में कार्य कर सकते हैं जिससे आपको बुरा महसूस हो सकता है।
  • अधिक थक जाना – पीटीएसडी के कारण सोना मुश्किल हो सकता है, लेकिन जितना संभव हो अपनी सामान्य नींद की दिनचर्या पर कायम रहने की कोशिश करें और देर तक जागने से बचें, क्योंकि इससे आपको बुरा महसूस हो सकता है। आप अच्छी नींद के बारे में हमारे संसाधन में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अंत में, आप गाड़ी चलाते समय भी सावधान रहना चाहेंगे और यदि आप गाड़ी चलाने में असुरक्षित महसूस करते हैं तो आपको DVLA को बताना चाहिए। कुछ दर्दनाक घटित होने के बाद लोगों को दुर्घटनाओं का अधिक खतरा हो सकता है।

जटिल पीटीएसडी क्या है?

कुछ लोगों में जटिल अभिघातजन्य तनाव विकार (जटिल पीटीएसडी) विकसित हो जाता है। यह किसी घटना या घटनाओं की श्रृंखला का अनुभव करने के कारण होता है जो बेहद खतरनाक या भयावह होती है। ये घटनाएँ बचपन में या वयस्क होने पर घटित हो सकती हैं।

अक्सर इन घटनाओं से आसानी से बचना या बचना कठिन या असंभव होता होगा। उदाहरण के लिए:

  • यातना
  • दासता
  • नरसंहार अभियान
  • युद्ध क्षेत्र में रहना
  • लंबे समय तक घरेलू हिंसा
  • बचपन में बार-बार यौन या शारीरिक शोषण। 

पीटीएसडी के लक्षणों के साथ-साथ, जटिल पीटीएसडी वाले लोग ये भी कर सकते हैं:

  • अपने बारे में 'कमतर, पराजित या नाकारा' के रूप में अत्यधिक नकारात्मक धारणाएँ पाल सकते हैं।
  • उन्हें अपनी भावनाओं और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में बहुत कठिनाई होती है
  • रिश्ते निभाना और दूसरे लोगों के करीब महसूस करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाता है

मैं जटिल पीटीएसडी से कैसे उबर सकता हूँ?

जटिल पीटीएसडी वाले लोगों में अन्य लोगों और सामान्य रूप से दुनिया पर विश्वास की कमी आम है। उन्हें चिकित्सक के साथ सुरक्षित संबंध विकसित करने देने की वजह से उपचार अक्सर लंबा होता है। जटिल पीटीएसडी से पीड़ित कोई व्यक्ति चिकित्सक के साथ जो काम करता है वह अक्सर तीन चरणों में होता है:

स्थिरीकरण

स्थिरीकरण चरण में आप अपने चिकित्सक पर भरोसा करना सीखेंगे, और कष्‍ट और अलगाव की अपनी भावनाओं को समझेंगे और नियंत्रित करेंगे।

स्थिरीकरण के भाग के रूप में, आप 'आत्‍मसांत्‍वना' तकनीक सीख सकते हैं। ये आपको सामान्य शारीरिक भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकते हैं, और आपको याद दिला सकते हैं कि आप वर्तमान में जी रहे हैं, न कि अतीत में।

स्थिरीकरण आपको डर और चिंता की भावनाओं को उन यादों और भावनाओं से अलग करने में मदद कर सकता है जो उन्हें उत्पन्न करती हैं। इससे इन यादों को कम भयावह बनाने में मदद मिल सकती है।

स्थिरीकरण का उद्देश्य यह है कि आप अंततः चिंता या पूर्वदृश्‍यों का अनुभव किए बिना अपना जीवन जीने में सक्षम होंगे।

कभी-कभी स्थिरीकरण ही एकमात्र सहायता हो सकती है जिसकी आवश्यकता होती है।

आघात-केंद्रित उपचार

ईएमडीआर या टीएफ-सीबीटी सहित आघात पर केंद्रित उपचार आपके दर्दनाक अनुभवों को संसाधित करने में आपकी सहायता कर सकता है। मनोगतिक मनोचिकित्सा सहित अन्य मनोचिकित्साएँ भी सहायक हो सकती हैं। जटिल पीटीएसडी में सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि अगर सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो ये उपचार स्थिति को और खराब कर सकते हैं।

पुन:एकीकरण या पुन:संयोजन

जीवन के एक नियमित तरीके में पुनः एकीकरण, आपको वास्तविक दुनिया का अभ्‍यस्‍त होने में मदद कर सकता है क्योंकि अब आप उस खतरनाक स्थिति में नहीं हैं जिसमें आप पहले थे। यह आपको खुद को अधिकारों और विकल्पों वाले व्यक्ति के रूप में देखना शुरू करने में मदद कर सकता है।

पुनर्एकीकरण से आपको मदद मिलेगी:

  • अपने और दूसरों के प्रति दयालुता का व्यवहार करने में
  • अपने और दूसरों पर विश्वास पुनः स्थापित करने में
  • आपके स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने वाली मित्रता, घनिष्ठ संबंधों और गतिविधियों में फिर से संलग्न होने में

दवाई

पीटीएसडी की तरह, मनोचिकित्सा के साथ-साथ अवसादरोधकों या अन्य दवाओं का भी उपयोग किया जा सकता है। यदि मनोचिकित्सा काम नहीं कर रही है या आपके लिए संभव नहीं है तो दवा का भी उपयोग किया जा सकता है। किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से आपकी दवा की समीक्षा कराने से भी मदद मिल सकती है।

स्वयं सहायता

यदि आपको जटिल पीटीएसडी है तो वे सामान्य चीजें करने का प्रयास करना सहायक हो सकता है जिनका आघात के आपके पिछले अनुभवों से कोई लेना-देना नहीं है। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • दोस्त बनाना
  • नौकरी पाना
  • नियमित व्यायाम करना
  • विश्राम तकनीक सीखना
  • एक शौक पालना
  • पालतू जानवर रखना।

ये चीज़ें आपको धीरे-धीरे अपने आस-पास की दुनिया पर भरोसा करने में मदद कर सकती हैं। हालाँकि, इसमें समय लग सकता है और इन चीज़ों को कठिन समझने या उन्हें तुरंत करने में असमर्थ होने में कोई शर्म की बात नहीं है।

मैं कैसे बता सकता हूं कि किसी को पीटीएसडी है?

यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसने हाल ही में किसी दर्दनाक घटना का अनुभव किया है, तो कुछ चीजें हैं जिन पर आप ध्यान देना चाहेंगे। ये चीजें संकेत हो सकती हैं कि वे सामना करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं:

  • व्यवहार में परिवर्तन काम पर खराब प्रदर्शन, देर से आना, बीमारी की छुट्टी लेना, छोटी-मोटी दुर्घटनाएँ
  • भावनाओं में परिवर्तन – क्रोध, चिड़चिड़ापन, अवसाद, रुचि की कमी और एकाग्रता की कमी
  • विचारों में परिवर्तन धमकियों या डर पर ध्यान देना, भविष्य के बारे में नकारात्मक विचार
  • अप्रत्याशित शारीरिक लक्षण जैसे सांस फूलना, उछल पड़ना या पेट में दर्द

यदि आपको लगता है कि किसी में पीटीएसडी के लक्षण दिख रहे हैं, तो आप उन्हें अपने जीपी से बात करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। यदि आप ऐसा करने के लिए उनके अध‍िक करीब महसूस नहीं करते हैं, तो हो सकता है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति से बात करना चाहें जिसके वे करीब हों, जो ऐसा कर सके।

उन्हें पीटीएसडी के बारे में इस संसाधन जैसी जानकारी देखने में भी मदद मिल सकती है, जिससे उन्हें होने वाली कठिनाइयों की पहचान करने में मदद मिल सके।

मैं किसी ऐसे व्यक्ति की सहायता कैसे कर सकता/सकती हूँ जिसने दर्दनाक घटना का अनुभव किया है?

किसी सदमे से गुज़रे व्यक्ति की सहायता में निम्नलिखित बातें सहयोग कर सकती हैं:

  • बात करें उन्हें अपने अनुभवों के बारे में आपसे बात करने की अनुमति देने के लिए समय निकालें।
  • सुनें – उन्हें बात करने दें और प्रवाह को बाधित करने या अपने अनुभव साझा करने का प्रयास न करें।
  • सामान्य प्रश्न पूछिए – अगर आप प्रश्न पूछते हैं तो कोशिश करें कि प्रश्न सामान्य और ग़ैर-आलोचनात्मक हो। उदाहरण के लिए आप पूछना चाह सकते हैं 'क्या आपने इस बारे में किसी और से बात की है?' या 'क्या कुछ अतिरिक्त सहायता पाने में मैं आपकी मदद कर सकता/सकती हूँ?'

आपको (इन बातों से) बचने का प्रयास करना चाहिए:

  • उन्हें बताना आप जानते हैं वे कैसा महसूस करते हैं – भले ही आपने वैसा ही कुछ अनुभव किया हो, लोग अलग अलग ढंग से स्थितियों का अनुभव करते हैं। तुलना करना अनुपयोगी हो सकता है।
  • उन्हें बताना वे भाग्यशाली हैं कि वे ज़िंदा बच गए – दर्दनाक घटनाओं का अनुभव करने वाले लोग अक्सर भाग्यशाली महसूस नहीं करेंगे। अगर दूसरों की मृत्यु हो गई है, तो अक्सर वे जीवित होने के लिए अपराधी महसूस कर सकते हैं।
  • उनके अनुभव को कम आंकना – यह जताने से बचें क‍ि स्थिति बदतर हो सकती थी, भले ही आप उन्हें बेहतर महसूस कराने की कोशिश कर रहे हों। इससे लोगों को ऐसा महसूस हो सकता है कि उनके अनुभव उचित नहीं हैं।
  • अनुपयोगी सुझाव देना – सुझाव देने से बचें, भले ही अतीत में आपके लिए ये सुझाव कारगर साबित हुए हों। लोग एक-दूसरे से बहुत अलग होते हैं और कई बार हो सकता है कि आपके सुझाव वे पहले ही आज़मा चुके हों।

और अधिक सहायता

पीटीएसडी पर जानकारी

यूके साइकोलॉजिकल ट्रॉमा सोसायटी – यहाँ आपको पोस्ट-ट्रोमैटिक स्ट्रेस रिएक्शंस के बारे में सामान्य जनता और स्वास्थ्य पेशेवरों के बारे में सामग्री मिल सकती है।

पीटीएसडी का अवलोकन, एनएचएस – एनएचएस की यह जानकारी पीटीएसडी को समेटे हुए है।

जटि‍ल पीटीएसडी का अवलोकन, एनएचएस – एनएचएस की यह जानकारी जटिल पीटीएसडी को समेटे हुए है।

पीटीएसडी, माइंड – परमार्थ संस्‍था माइंड के पास पीटीएसडी और जट‍िल पीटीएसडी के बारे में जानकारी है

दोस्त और परिवार कैसे मदद कर सकते हैं? माइंड – यह जानकारी सुझाव देती है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति की सहायता कैसे कर सकते हैं जिसे आप जानते हैं कि पीटीएसडी है।

उपयोगी संपर्क, माइंड  – इस पृष्ठ में अन्य परमार्थ संस्थाओं और संगठनों के लिंक हैं जो पीटीएसडी वाले लोगों को सहायता प्रदान करते हैं

पीटीएसडी से पीड़ित लोगों की सहायता करने वाली संस्थाएँ

यहां कुछ परमार्थ संस्थाएं हैं जो पीटीएसडी या दर्दनाक घटनाओं का अनुभव करने वाले लोगों को सहायता प्रदान करते हैं:

पीटीएसडी यूके – पीटीएसडी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित एक यूके परमार्थ संस्था

कॉम्बैट स्ट्रेस – वयोवृद्धों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए यूके परमार्थ संस्था।

क्रूज़ बीरीवमेंट केयर – इंग्लैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में शोक संतप्त लोगों के लिए सहायता प्रदान करने वाली एक परमार्थ संस्था

क्रूज़ बेरेवमेंट केयर स्कॉटलैंड – स्कॉटलैंड में शोक संतप्त लोगों की भलाई को बढ़ावा देने वाली एक परमार्थ संस्था

बलात्कार संकट – तीन बलात्कार संकट परमार्थ संस्थाएं हैं जो पूरे ब्रिटन में लोगों को सहायता प्रदान करती हैं:

पीड़ित सहायता – तीन पीड़ित सहायता परमार्थ संस्थाएँ जो यूके भर में अपराध और दर्दनाक घटनाओं के शिकार लोगों को सहायता प्रदान करती हैं:

आभार

यह जानकारी रॉयल कॉलेज ऑफ़ साइक्यैट्रिस्ट्स के पब्लिक एंगेजमेंट एडिटोरियल बोर्ड (पीईईबी) द्वारा तैयार की गई थी। यह लेखन के समय उपलब्ध सर्वोत्तम साक्ष्य को दर्शाती है। 

पीटीएसडी यूके को विशेष धन्यवाद, जिन्होंने इस संसाधन पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

विशेषज्ञ संपादक: प्रोफ़ेसर नील ग्रीनबर्ग 

इस संसाधन के लिए पूर्ण संदर्भ अनुरोध पर उपलब्ध हैं।

प्रकाशित: नवंबर 2021

समीक्षा समय: नवंबर 2024

© रॉयल कॉलेज ऑफ़ साइक्यैट्रिस्ट्स

This translation was produced by CLEAR Global (Aug 2023)
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